सैलानी की बैसाखी से दिव्यांगों को मिला सहारा

Disabled people got support from tourist's crutches

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रिपोर्ट : कमलाकांत शुक्ल

महराजगंज (आजमगढ़)हंसना मुझे भी आता था, पर किसी ने रोना सिखा दिया । खुद को सवांरने में हम भी माहिर थे, लोगों के दर्द ने अपना बना लिया ।उक्त सैर स्थानीय कस्बा निवासी सैलानी सैनी के लिए सटीक बैठती है, जिन्होंने वकालत की पढ़ाई कर अपने परिवार का भविष्य संवारने का सपना देखा था । किंतु वकालत की पढ़ाई के दौरान ही समाज में दिव्यांगों की उपेक्षा और दुर्दशा ने उनके हृदय को इस तरह प्रभावित किया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन ही दिव्यांगों की सेवा में समर्पित कर दिया । उनके इस नेक कार्य में उनकी पत्नी पिंकी सैनी ने भी बराबर की जिम्मेदारियां निभा रही हैं ।नगर पंचायत स्थित विकासखंड कार्यालय के सामने संचालित महात्मा ज्योतिर्वा फूले दिव्यांग विद्यालय के प्रबंधक सैनी वर्ष 2009 में वकालत की पढ़ाई करते समय अपने एक रिश्तेदार के घर गए जहां उन्होंने एक ही परिवार के चार दिव्यांगों की दयनीय दशा तथा अपने ही स्वजनों द्वारा की जा रही उपेक्षा देखकर काफी द्रवित हुए और वापस आकर उन्होंने अपने हृदय की करुणा को पत्नी पिंकी सैनी से बयां करते हुए कहा कि अपने परिवार को संवारने के लिए तो सभी करते हैं किंतु हमें ऐसे लोगों के लिए कुछ करना है जिनकी उपेक्षा अपनों द्वारा ही की जाती है । पत्नी भी पति के विचारों से सहमत होते हुए पति दर्द में सहभागी बन गयी और दोनों ने दिव्यांगों का जीवन संवारने का संकल्प लिया । फिर दोनों ने विशेष बीएड का कोर्स किया । संसाधनों के अभाव में अपनी परिकल्पना को साकार करने के लिए कुछ समाजसेवियों के समक्ष अपना विचार रखा । इसी बीच उनकी मुलाकात आजमगढ़ निवासी संतोष श्रीवास्तव व उनकी पत्नी रूबी श्रीवास्तव से हुई तो वे भी काफी प्रभावित हुए और आजीवन इस नेक कार्य में सहयोग का भरोसा दिया । उन्हीं लोगों के सहयोग से कस्बे के एक किराए के मकान में दिव्यांगों को स्वावलंबी बनाने के लिए एक शिक्षण संस्थान की नींव रखा । वर्तमान में इस संस्थान में लगभग 35 की संख्या में बच्चे आते हैं जिन्हें उनकी क्षमतानुसार शैक्षणिक और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाता है तथा उनके लिए भोजन वस्त्र व रहने का भी प्रबंध किया जाता है । खास बात यह है कि ऐसे सराहनीय कार्य में सरकार और जनप्रतिनिधियों का कोई योगदान अब तक प्राप्त नहीं है । संसाधनों की कमी तथा धनाभाव की स्थिति में उनकी पत्नी पिंकी सैनी ने नारी शृंगार को भी बंधक रख दिया ।

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