हैदराबाद में शांतिपूर्ण तरीके से निकला ऐतिहासिक ‘बीबी का आलम’ जुलूस

Historical 'Bibi Ka Alam' procession took place peacefully in Hyderabad

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हैदराबाद, 17 जुलाई: ‘यौम-ए-आशूरा’ के मौके पर बुधवार को हैदराबाद में ‘बीबी का आलम’ जुलूस निकाला गया।हजारों लोगों ने ‘बीबी का आलम’ जुलूस में हिस्सा लिया जो पुराने शहर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ मूसी नदी के तट पर चंद्रघाट में संपन्न हुआ।

इस्लामी कैलेंडर में मुहर्रम महीने के 10वें दिन को ‘यौम-ए-आशूरा’ कहा जाता है। इस मौके पर कर्बला की लड़ाई में पैगम्बर मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत को याद किया जाता है।माना जाता है कि ‘बीबी का आलम’ लकड़ी की एक तख्त है जिस पर पैगम्बर साहब की बेटी बीबी फातिमा जहरा को अंतिम स्नान कराया गया था। आज से 430 साल से भी पहले कुतुब शाही वंश के शासनकाल में कर्नाटक से सजे-धजे हाथियों पर इसे लाया गया था।जुलूस बीबी का अलावा से शुरू हुआ और शेख फैज कमन, याकूतपुरा दरवाजा, एतबार चौक, चारमीनार, गुलजार हौज, पंजेशाह, मनी मीर आलम, पुरानी हवेली और दारुलशिफा से गुजरा।चाकुओं, ब्लेड वाले चेन और दूसरे धारदार हथियारों से लैस नंगे पांव युवकों ने ‘या हुसैन’ कहकर विलाप किया और ‘मर्सिया’ और ‘नोहा-खवानी’ पढ़ते रहे और खुद को घायल करते रहे। अन्य लोग छाती पीटकर विलाप कर रहे थे।

पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे। जुलूस के लिए ट्रैफिक डायवर्ट किया गया था। जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।’आलम’ रुपावती नाम की हथिनी पर रखा था जिसे कर्नाटक से लाया गया था। केंद्र सरकार द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में हाथियों को ले जाने के नियमों में बदलाव के कारण कर्नाटक के दावणगेरे स्थित श्री जगदगुरु पंचायत मंदिर से हथिनी के आने में देरी हुई। बाद में दोनों राज्यों के वन मंत्रियों के बीच बातचीत के से मामला सुलझा लिया गया।

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