दुनिया की रंगीनियों से हटकर आख़ेरत की करो तैयारी: सैयद शाने आलम
दीन की तालीम हासिल करो गुमराही की दलदल से निकल जाओगे: मौलाना जिकरुल्लाह मक्की अल अक्सा कमेटी द्वारा इस्लाह मआशरा व जश्ने ग़ौसुल वरा कांफ्रेंस हुआ सम्पन्न

रिपोर्ट अशरफ संजरी
भदोही। मुहल्ला गोरियाना स्थित कुजराने वाली मस्जिद के सामने मैदान में बीती रात अल अक्सा कमेटी द्वारा इस्लाह मआशरा व जश्ने ग़ौसुल वरा कांफ्रेंस का आयोजन हजरत हाफिजो कारी मौलाना अरफ़ात हुसैन अशरफी की कयादत में किया गया है। कांफ्रेंस का आगाज़ हाफ़िज़ व कारी अली रज़ा व हाफिज कारी फहद अत्तारी ने किया। मद्दाहे खैरुल अनाम सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम शायर समीर रजा, अयान अख्तर, अब्दुल कादिर, अदनान रजा, महमूद चिश्ती, ताहा और यासीन जोड़वा शायरों ने नाते नबी पढ़ कर लोगो को झूमने पर मजबूर कर दिया। मेम्बरे नूर पे जलवाबार आले रसूल हजरत अल्लामा व मौलाना सैयद शाने आलम ने इस्लाही तकरीर किया। उन्होंने मुसलमानों के बद से बदतर हालात पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा आजका मुसलमान अपने नबी की बताए हुए बातों को छोड़ कर यहूदो नसारा के कल्चर को अपनाता हुआ नजर आ रहा है, दुनिया की रंगीनियों में डूबा चला जा रहा है, उन्हें आख़ेरत की कोई फिक्र नही। कहा आज का मुसलमान झूठ, चुगली, दुसरो की बुराई करने में लगा हुआ है। जहां देखो मुसलमान के बच्चे चाय पान की दुकानों पर गप्पे मारता हुआ नजर आ रहा है। अज़ान हो रही है मोबाइल देख रहा उन्हें कोई डर नही कोई खौफ नही। कहा याद रखो कल हश्र बपा होगा परवरदिगार तुम्हे अपने सामने खड़ा कर एक-एक सवाल पूछेगा। तुमको हमने जवानी अता की इसे किस तरह गुजारा, तुम्हारे हांथ, पैर, आंख, कान सही सलामत रखा तुमने मेरी राह में किस तरह यूज किया। तुम्हारा यही हाल रहा तो तुम एक भी सवाल का जवाब नही दे पाओगे और तुम्हे हमेशा-हमेशा के लिए जहन्नम में डाल दिया जाएगा। कहा याद रखो मौत अनक़रीब है। अपने गुनाहों से तौबा कर लो अभी वक्त है अल्लाह रहीम है, करीम है, माफ करने वाला है।आज हमारी कौम की मां बहनें बाजारों में नंगे सर घूमती हुई नजर आ रही हैं। मेरी माँ बहनों से नस्लें आबाद होती है। जब तुम मजहबे इस्लाम के रास्ते पर चलोगी तो तम्हारी आने वाली नस्लें मजहबे इस्लाम की शैदाई होंगी। कहा मजहबे इस्लाम ने औरतों और बच्चियों के हक व हुक़ूक़ की बहोत बड़ी अहमियत दी है। कहा बेटियों और बहनों की हक को अदा करो। निकाह को आसान करो जैसा कि नबी की सुन्नत है। कहा अपने बच्चों को इस्लामी सांचे में ढालो, इल्म सिखाओ। आज हमारा समाज तालीम से कोसो दूर नज़र आ रहा है। कहा तालीम वह रौशनी है जिससे घर, परिवार व समाज को रौशनी बख्शी जा सकती है। बगैर तालीम के हम तरक्की नही कर सकते। मौलाना जिकरुल्लाह मक्की ने भी इस्लाही तकरीर करते हुए कहा कि अपने जान, माल और औलाद से भी ज्यादा नबी से मोहब्बत करो और नबी की हर एक सुन्नत पर अमल करते हुए जिंदगी गुजारो। दुनिया मे सुर्खरू रहोगे और आख़ेरत में भी कामियाब रहोगे। मौलाना ने कहा तक दीन की तालीम हासिल नही करोगे तब तक गुमराही की दलदल से नही निकल पाओगे। अपने बच्चों को दीन की तालीम से आरास्ता कर आख़ेरत को सँवारो।
कांफ्रेंस की सरपरस्ती काज़ी-ए-शहर उस्तादुल हुफ्फाज़ हाफ़िज़ व कारी परवेज़ उर्फ अच्छे मियां ने की तो जेरे सदारत इमामे ईदगाह हाफ़िज़ व कारी अशफाक रब्बानी ने किया। मेम्बरे नूर पे जलवाबार इमामे ईदगाह हाफिज व कारी तबरेज अंसारी सहित दीगर उल्मा व हुफ्फाज़ो की नूरानी अंजुमन रहीं। वहीं हाफिजो कारी मौलाना अरफ़ात हुसैन अशरफी ने कांफ्रेंस में आए हुए सामेइन का शुक्रिया अदा किया।



