Azamgarh :IGRS पोर्टल पर फर्जी निस्तारण का खेल: जनता परेशान, अफसर लूट रहे वाहवाही!
IGRS पोर्टल पर फर्जी निस्तारण का खेल: जनता परेशान, अफसर लूट रहे वाहवाही!

रिपोर्टर जीतेन्द्र यादव
जीयनपुर आजमगढ़
आजमगढ़ के सगड़ी तहसील में IGRS पोर्टल को ‘समाधान एक्सप्रेस’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन असल में यह ‘लूट एक्सप्रेस’ बन चुका है!
बात हो रही है अज़मतगढ़ ब्लॉक के बेरमा गांव की, जहां जितेंद्र यादव ने अपनी पुत्री अदिति का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एक लंबी सरकारी दौड़ शुरू की। SDM से आदेश प्राप्त कर आवेदन एडीओ पंचायत अज़मतगढ़ को सौंपा गया। एडीओ ने अपने दस्तखत कर दिए और आवेदन अपने पास रख लिया। लेकिन, असली खेल तब शुरू हुआ जब उनके मातहत सचिव प्रदीप उपाध्याय और सहयोगी सुदामा प्रसाद ने रिपोर्ट लगाने के लिए पैसे की माँग शुरू कर दी।
“बिना घूस के कोई फाइल नहीं चलती”— यह सरकारी कार्यालयों का अनकहा नियम बन चुका है। जब जितेंद्र यादव ने पैसे देने से मना कर दिया, तो उन्हें महीनों तक चक्कर लगवाया गया। शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
IGRS पर शिकायत, अफसरों की ‘निपटाने’ की कला!
थक-हारकर जितेंद्र यादव ने IGRS पोर्टल पर तीन बार शिकायत दर्ज करवाई, जिसका क्रमांक क्रमशः 40019124042157, 40019124043719, 40019124045589 है लेकिन हर बार शिकायत को फर्जी रिपोर्ट लगाकर निस्तारित कर दिया गया।
मजेदार बात यह है कि सगड़ी तहसील को IGRS पोर्टल पर मामलों के निस्तारण में प्रथम स्थान मिला हुआ है। यानी आंकड़ों में यह तहसील सबसे तेज और सबसे प्रभावी तरीके से समस्याओं का समाधान कर रही है! लेकिन असलियत यह है कि समाधान से ज्यादा ध्यान “निपटाने” पर दिया जा रहा है—वह भी बिना किसी कार्रवाई के।
बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार भी इस खेल से अनजान है? या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है?
योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, लेकिन सगड़ी तहसील में हो रही यह लूट इस दावे को ठेंगा दिखा रही है। जब अफसरों को मालूम है कि किसी भी शिकायत को कागजों में “सही” बताकर आसानी से बंद किया जा सकता है, तो फिर जनता की सुनवाई क्यों होगी?
इस खेल का असली फायदा किसे मिल रहा है?
सिस्टम को चूना लगाने वाले अफसरों को, पैसा वसूलने वाले बाबू और सचिव को और सरकारी आंकड़ों में टॉप रैंकिंग पाने वाले अधिकारियों को और नुकसान किसका हो रहा है? आम जनता का, जो न्याय के लिए दर-दर भटक रही है!
फर्जी निस्तारण के खेल पर कब लगेगी लगाम?
सरकारी रिकॉर्ड में जितेंद्र यादव की शिकायत तीन बार ‘सफलतापूर्वक’ निपटाई जा चुकी है। लेकिन क्या वास्तव में समस्या हल हुई? नहीं! अगर अफसर अपनी वाहवाही के चक्कर में झूठी रिपोर्ट लगाते रहेंगे, तो जनता न्याय के लिए कहां जाएगी?
सरकार को चाहिए कि IGRS पर दर्ज की गई शिकायतों का ऑडिट हो, हर मामले की वास्तविक जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। वरना यह सिस्टम सिर्फ एक ‘डिजिटल भ्रष्टाचार पोर्टल’ बनकर रह जाएगा, जहां जनता अपनी शिकायतें दर्ज कराएगी और अधिकारी फर्जी निस्तारण कर अपनी पीठ थपथपाते रहेंगे।
क्या यही है ‘नया उत्तर प्रदेश’?
या फिर यह सिर्फ एक नया तरीका है जनता को बेवकूफ बनाने का?



