जिनके सर पर बोर्ड परीक्षा का बीड़ा, आखिर कौन सुनेगा उनकी पीड़ा

रिपोर्ट : कमलाकांत शुक्ल

महराजगंज/आजमगढ़:माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं गत 24 फरवरी से संचालित हैं । विभागीय उच्चाधिकारियों के समक्ष परीक्षा में नकल को रोकना चुनौती बना है, जिसकी कवायद में विभाग कई महीनों से लगा हुआ हैं और ऐसे फरमान जारी हो रहे हैं जो परीक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्र व्यवस्थापकों के उत्पीड़न मात्र तक सिमट कर रह जा रहा हैं तथा उनकी पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है ।परीक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे लगभग आधा दर्जन केंद्र व्यवस्थापकों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी पीड़ा व्यक्त किया और कहा कि विभाग हम्ही से काम लेता है और हम पर ही शक करता है । नकल रोकने के लिए परिषद द्वारा जहां पूर्व मे ही सभी कक्षों में सीसीटीवी कैमरा, वॉइस रिकॉर्डर लगवाया गया । सभी केंद्रों पर स्ट्रांग रूम बनाए गए जिसमें प्रथम पाली व द्वितीय पाली के लिए अलग-अलग आलमारियां तथा एक आलमारी लूज पेपर व दूसरी सभी प्रश्नपत्रों के अतिरिक्त प्रश्न पत्र रखने के लिए कुल चार अलमारियों का प्रबंध कराया गया किंतु इसके बजट का कोई प्रबंध नहीं किया गया । स्ट्रांग रूम की एक आलमारी में अतिरिक्त पेपर सेट को रखवा कर उसकी चाभी स्थानीय थाने को दी गई है । अतिरिक्त प्रश्न पत्रों को केंद्र पर रखवाने की जरूरत ही क्या थी । केंद्र व्यवस्थापकों की निगरानी के लिए सभी केंद्रों पर वाह्य केंद्र व्यवस्थापक व स्टेटिक मजिस्ट्रेट को नियुक्त किया गया है जिसमें कई परीक्षा केंद्रों पर नियुक्त स्टेटिक मजिस्ट्रेटों का ओहदा केंद्र व्यवस्थापकों से छोटा है । स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए पुलिस बल की व्यवस्था की गई है जिनकी निगरानी में ही परीक्षा संचालक स्ट्रांग रूम में प्रवेश करते हैं जबकि पूर्व में परीक्षा केन्द्रों के अंदर पुलिस का प्रवेश पूर्णतया वर्जित हुआ करता था । परीक्षा संपन्न होने के पश्चात उत्तर पुस्तिकाओं को जिला मुख्यालय स्थित संकलन केंद्र पर समय से भेजने के लिए बंडल वाहकों को प्रति पाली मात्र ₹20 भुगतान किया जाता है जबकि दूरस्थ स्थित केन्द्र से जिला मुख्यालय की दूरी 40 से 50 किलोमीटर है जिसके लिए डेढ़ से ₹200 केंद्र व्यवस्थापकों को निजी मद से व्यय करना पड़ता है । अन्यथा उत्तर पुस्तिकाओं को ले जाने के लिए कोई कर्मचारी तैयार नहीं होता है । सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कई स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाती है । कभी विद्युत कटौती, नेटवर्क की समस्या तथा तकनीकी फाल्ट आने से यदि इनके संचालन में अवरोध उत्पन्न होता है तो उसके लिए भी केंद्र व्यवस्थापक को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिकारियों द्वारा नोटिस देकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है । परीक्षा की तैयारी के दौरान होने वाली बैठकों में उनके द्वारा जब अपनी पीड़ा व्यक्त करने का प्रयास किया जाता है तो उसे सुनने के बजाय अधिकारियों द्वारा सिर्फ फरमानों के अनुपालन की नसीहत दी जाती है ।उक्त सारी कवायदों के बावजूद भी परीक्षाओं में नकल है कि रुकने का नाम नहीं ले रही है । ऐसे में तत्कालीन प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर अपनी ही पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की सरकार सवालिया निशान लगाती नजर आती है । उस समय न तो सीसी कैमरा था और ना ही पुलिस कर्मियों को केंद्र के अंदर प्रवेश की अनुमति थी इसके बावजूद भी वह सरकार पूरे प्रदेश में नकल रोकने में कामयाब रही । आखिर क्या कारण है कि वर्तमान सरकार अपनी ही सरकार के क्रियाकलापों से सीख लेने के बजाय शिक्षकों तथा कर्मचारियों का उत्पीड़न करने में जुटी है ।

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