मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली की समस्याओं पर की बातचीत, बिजली, पानी, शिक्षा और अवैध प्रवासियों के मुद्दों पर दी जानकारी

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नई दिल्ली, 22 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में दिल्ली की बिजली, पानी, शिक्षा और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दों पर अपनी योजनाओं और सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने माना कि दिल्ली की समस्याओं का समाधान एक साथ नहीं हो सकता, लेकिन गर्मी के मौसम में निर्बाध अन-इंटरप्टेड बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना उनकी पहली प्राथमिकता है। शिक्षा के क्षेत्र में सूद ने दिल्ली के स्कूलों के खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के स्तर में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसके अलावा, अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई और दिल्ली सरकार में अधिकारियों के समन्वय से काम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली की समस्याओं का समाधान एक दिन या 100 दिनों में संभव नहीं है। उनका कहना था कि दिल्ली में बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर की जो समस्याएं हैं, उन सभी को इतनी जल्दी हल करना असंभव है। हालांकि, उनकी सरकार का लक्ष्य है कि 100 दिनों के भीतर दिल्लीवासियों को निर्बाध अनइंटरप्टेड बिजली और पानी की सप्लाई मिले, विशेषकर गर्मी के मौसम में। यह उनकी प्राथमिकता है, क्योंकि इस समय इन बुनियादी सुविधाओं की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

शिक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए सूद ने कहा कि दिल्ली के स्कूलों का हाल बहुत खराब है। उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के स्तर को सुधारने की बजाय केवल प्रचार पर ध्यान दिया। महावीर एंक्लेव में एक स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां के माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने के बाद भगवान से केवल यह प्रार्थना करते हैं कि उनका बच्चा सुरक्षित घर लौटे। यह दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की सच्चाई है, जैसा कि सूद ने बताया।

दिल्ली के स्कूलों में कंप्यूटर लैब्स की स्थिति और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में सूद ने कहा कि इनमें सुधार की जरूरत है, क्योंकि बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने यह भी बताया कि 2015 के बाद 44 नए स्कूलों का निर्माण हुआ है, लेकिन इनमें से केवल 19 स्कूलों को ही सरकार की मंजूरी मिल पाई। उनका मानना है कि स्कूलों के ढांचे में सुधार और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है, न कि केवल घोषणाएं करना।

जब उनसे दिल्ली के स्कूलों में रामायण, योग और वेद जैसे वैदिक विषयों को पढ़ाने के बारे में पूछा गया, तो सूद ने योग की शिक्षा को जरूरी बताया। उनका कहना था कि बच्चों को मानसिक दबाव और तनाव से उबरने के लिए योग और अध्यात्म की शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाए।

वहीं, दिल्ली सरकार के वालंटियर्स की भूमिका पर बात करते हुए सूद ने कहा कि पिछले 25-26 दिनों में उन वालंटियर्स का काम प्रभावित नजर आया, और स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।

अरविंद केजरीवाल के पंजाब में डटे रहने पर सूद ने कहा कि यह पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब मुख्यमंत्री पंजाब में रहकर काम कर रहे होते हैं, तो भगवंत मान के पीछे चलने की स्थिति दिखती है, जो कांग्रेस के नेताओं सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की याद दिलाती है।

अवैध बांग्लादेशियों के मुद्दे पर सूद ने कहा कि दिल्ली से अवैध रूप से घुसे हुए बांग्लादेशियों को किसी भी सूरत में नहीं रहने दिया जाएगा। उनकी सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जिन्होंने इन अवैध प्रवासियों को दिल्ली में घुसने का रास्ता दिया और उनकी मदद की।

दिल्ली के अफसरों द्वारा मंत्रियों की नहीं सुनी जाने की शिकायत पर सूद ने कहा कि प्रशासन का काम केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समन्वय की प्रक्रिया है। उनका कहना था कि मंत्री और अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं और प्रशासन में सुधार के लिए एकजुट हैं।

–आईएएनएस

पीएसएम/सीबीटी

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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