स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सदन में गूंजे गुड्डू जमाली,अतरौलिया कांड का जिक्र, जिला अस्पतालों में भ्रष्टाचार और संसाधनों की कमी पर सरकार को घेरा

Guddu Jamali raised voice in the House regarding health services, demand for opening 10-15 world class hospitals in the

लखनऊ/आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधान परिषद सदस्य और मुबारकपुर के पूर्व विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने बुधवार को विधान परिषद के मानसून सत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सरकार को घेरा और आबादी के अनुपात में प्रदेश में कम से कम 10-15 पीजीआई, केजीएमसी और लोहिया संस्थान जैसे विश्वस्तरीय अस्पताल खोलने की मांग की। उन्होंने आजमगढ़ और मुबारकपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं को “हाइटेक” बनाने पर भी जोर दिया।गुड्डू जमाली ने कहा कि स्वास्थ्य इंसान की जिंदगी से जुड़ा सबसे बुनियादी अधिकार है, लेकिन प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश स्वास्थ्य सूचकांक में देश में सबसे पीछे है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। “पिछली बार 43,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था, लेकिन केवल 68 प्रतिशत ही खर्च हुआ। जबकि, संसाधनों की भारी कमी होने के बावजूद बजट का शेष रह जाना सरकार की इच्छाशक्ति पर सवाल खड़ा करता है।”उन्होंने पीजीआई, केजीएमसी और लोहिया संस्थान जैसे अस्पतालों की वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे डॉक्टर अत्यंत विद्वान हैं, लेकिन आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के मुताबिक आबादी के अनुपात में पर्याप्त डॉक्टर, बेड और चिकित्सा उपकरण नहीं हैं। “उत्तर प्रदेश एक छोटे देश जैसा है, जनसंख्या अमेरिका से थोड़ी ही कम है। इस अनुपात में स्वास्थ्य व्यवस्था भी होनी चाहिए।”

अतरौलिया कांड का जिक्र
जमाली ने अतरौलिया की एक घटना का जिक्र करते हुए जिला अस्पतालों में फैले भ्रष्टाचार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन कुछ लोग जनता के गाढ़ी कमाई से आए पैसे की बंदरबांट कर जाते हैं। अतरौलिया के डॉ. सुरेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप साबित हुए हैं, लेकिन एक साल से कार्रवाई लंबित है। इससे भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ता है।”

आजमगढ़ जिला अस्पताल की बदहाली
आजमगढ़ के सदर अस्पताल की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “एमआरआई मशीन नहीं है, सीटी स्कैन मशीन महीनों खराब रहती है, एक रेडियोलॉजिस्ट है जबकि जरूरत तीन-चार की है। डायलिसिस की हालत इतनी खराब है कि पांच-छह महीने बाद नंबर आता है, तब तक कई मरीजों की मौत हो जाती है।”

मुबारकपुर की स्वास्थ्य समस्या
मुबारकपुर की आबादी डेढ़ लाख से अधिक होने के बावजूद, वहां पर कोई नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट या आर्थोपेडिक विशेषज्ञ नहीं है। रात्रि में इमरजेंसी की हालत ऐसी है कि प्राथमिक उपचार न मिलने से हर हफ्ते दो-चार मौतें हो जाती हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और ब्लड बैंक की सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल तक पहुंचने में देरी हो जाती है।

सरकार से सीधी मांग
गुड्डू जमाली ने सभापति के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि मुबारकपुर और आजमगढ़ के अस्पतालों को प्राथमिकता पर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, वहां ब्लड बैंक, अत्याधुनिक मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात किए जाएं। साथ ही, पूरे प्रदेश में आबादी के अनुपात से 10-15 विश्वस्तरीय अस्पताल खोले जाएं।अंत में उन्होंने कहा, “हमारे डॉक्टरों में क्षमता की कोई कमी नहीं, बस उन्हें संसाधन मिल जाएं तो उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत को नजरअंदाज करना इंसान की जिंदगी से खिलवाड़ है, इसे सरकार को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”

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