विद्या वाचस्पति सम्मान से निखरी प्रतिभाओं की आभा, मुंबई में हुआ भव्य आयोजन

मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन ऑडिटोरियम ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनते हुए देश की दस शीर्ष हस्तियों को विद्या वाचस्पति (मानद डॉक्टरेट) की उपाधि प्रदान किए जाने का गौरव प्राप्त किया। यह सम्मान विक्रमशिला विद्यापीठ की ओर से आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया गया, जिसकी शोभा केंद्रीय मंत्री श्री रामदास आठवले और विद्यापीठ के कुलपति डॉ. संभाजीराव बाविस्कर की गरिमामयी उपस्थिति ने और भी बढ़ा दी।

समारोह का माहौल बेहद गरिमामय और उत्साहपूर्ण रहा। देश के विभिन्न क्षेत्रों में अमिट योगदान देने वाले इन चुनिंदा व्यक्तित्वों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय फिल्म और संगीत जगत से लेकर सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक क्षेत्र की कई चर्चित शख्सियतें मौजूद थीं। खास बात यह रही कि मशहूर गायिका और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जसपिंदर नरुला की उपस्थिति ने समारोह की प्रतिष्ठा को और ऊँचाई प्रदान की।

सम्मानित हस्तियां और उनका योगदान

इस अवसर पर अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जिन 10 प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों को विद्या वाचस्पति की उपाधि से नवाजा गया, उनमें शामिल हैं—

विवान कारुलकर ,श्री जगमोहन अरोड़ा , परेश बांगर ,सुनील पाल ,जयशंकर प्रसाद शुक्ल ,राजेश सिंह दयाल ,देबोजीत साहा
,चक्रवथुला रामनाचार्य ,अमित भाटी

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने जहां देश की सांस्कृतिक और शैक्षिक धरोहर पर अपने विचार साझा किए, वहीं सम्मानित हस्तियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आगे भी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ काम करने का संकल्प दोहराया। मंच से दिए गए भाषणों ने यह संदेश भी स्पष्ट किया कि विद्या वाचस्पति जैसी उपाधियां केवल सम्मान नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी को और गहरा करती हैं।

विक्रमशिला विद्यापीठ की परंपरा

विक्रमशिला विद्यापीठ द्वारा यह सम्मान पूर्व में भी देश-विदेश की नामचीन हस्तियों को दिया जाता रहा है। संस्था का मानना है कि समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती है। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी विद्यापीठ ने ऐसे व्यक्तित्वों को चुना, जिन्होंने अपनी मेहनत, सोच और कर्म के बल पर देश के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किए।

मुंबई में संपन्न यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे व्यक्तित्वों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास था। विद्या वाचस्पति सम्मान ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि देश प्रतिभा, मेहनत और सेवा भाव को पहचानना और सराहना अच्छी तरह जानता है। इस अवसर पर उपस्थित दर्शकों और विशिष्ट अतिथियों ने इन सभी प्रतिभाओं को दिल से बधाई देते हुए भविष्य में उनके और ऊँचाइयों तक पहुंचने की कामना की।

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