आजमगढ़ में पुलिस सुधार की नई मिसाल, 34 लाइन हाजिर और 94 का तबादला
Azamgarh sees new police reforms, with 34 on line duty and 94 transferred.

आजमगढ़। जिले में भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने जिस दृढ़ता और निडरता के साथ कार्रवाई की है, वह प्रशासनिक इतिहास में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में आजमगढ़ पुलिस ने साफ कर दिया है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है।लगातार मिल रही शिकायतों और गहन जांच के बाद जिले के 16 थानों में तैनात 34 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। इन पर आर्थिक अनियमितताओं, अवैध वसूली और कदाचार जैसे गंभीर आरोप थे। खास बात यह रही कि वर्षों से एक ही थाने या चौकी पर जमे पुलिसकर्मियों पर भी एसपी ने बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई की।गंभीरपुर थाने में पासपोर्ट कार्य से जुड़े आर्थिक अपराधों पर भी एसपी की पैनी नजर रही। यहां तैनात चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर यह स्पष्ट कर दिया गया कि आम जनता की जरूरतों का शोषण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी भ्रष्टाचार के मामलों में सब-इंस्पेक्टर को जेल भेजा जाना और कई पुलिसकर्मियों का निलंबन, डॉ. अनिल कुमार की निष्पक्ष और ईमानदार कार्यशैली को दर्शाता है।
केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दिशा में भी एसपी ने ठोस कदम उठाए। जिले की कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 19 थानों के 94 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया, ताकि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण पनपने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।एसपी डॉ. अनिल कुमार की यह मुहिम जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जीवंत उदाहरण बन गई है।उनकी इस सख्त और पारदर्शी कार्रवाई से न केवल पुलिस महकमे में अनुशासन स्थापित हुआ है, बल्कि आम जनता का पुलिस पर भरोसा भी मजबूत हुआ है। आजमगढ़ में कानून का राज और ईमानदार प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम एक ऐतिहासिक पहल के रूप में याद किया जाएगा।



