आजमगढ़ में अधिक शहद उत्पादन हेतु मातृ मौनवंशों के सम्वर्धन की अपील

Appeal for promotion of mother bee colonies for higher honey production in Azamgarh

आजमगढ़ 21 जनवरी– जिला उद्यान अधिकारी ने बताया है कि माह नवम्बर एवं दिसम्बर में लाही/यूकेलिप्टस के फूलों के पराग एवं पुष्प रस की प्राप्ति से भौनवंश सशक्त हो जाते है एवं प्रदर्शन (मधु उत्पादक) मौनालय से मधु भी नवम्बर के अन्तिम सप्ताह से प्राप्त होने लगता है। काली/पीली सरसों में जनवरी के प्रथम सप्ताह में फूल खिलने लगते है, जिसका भरपूर लाभ लेने के लिए पहले से प्रक्षेत्र का चयन कर मौनवंशों का समय से माइग्रेशन कर, मधु एवं मौनवंश सम्बर्धन का पूर्ण लाभ प्राप्त करने का यह सर्वाेत्तम समय है।उन्होने बताया कि माह जनवरी, फरवरी एवं मार्च 2026 में मौनपालक स्थानाभाव होने पर यथा आवश्यक मौमी छत्ताधार मौनवंशों को सुलभ करा देना चाहिए तथा काली/ पीली सरसों में 10 प्रतिशत फूल खिल जाने पर मौनवंशों का माइग्रेशन अवश्य कर देना चाहिए। मौनगृहों पर सफेद पेन्टिंग करा कर इन पर लाल रंग से मौनालयवार मौनवंश संख्या अंकित की जाये। मौनगृह के तलपट एवं सम्बन्धित उपकरणों का पोटेशियम परमैगनेट/लाल दवा से माह में एक बार धुलाई करें। अधिक सर्दी से मौनवंशों की सुरक्षा के लिए प्रवेश द्वार छोटा किया जाये तथा टाप कवर के नीचे जूट का बोरा रख कर मौनवंशो का तापक्रम नियंत्रित रखें तथा मौन गृहों की दरारों को बन्द कर ठण्डी हवाओं से बंचाना चाहिए। नाइट के प्रकोप से बचाने के लिए मौनगृह के तलपट की साफ सफाई समय-समय पर करते रहना चाहिए एवं खाली मानगृहों को धूप में सुखा कर मौनवंशों को बदलते रहना चाहिए तथा वाटमबोर्ड पर सल्फर की डस्टिंग करते रहना चाहिए।गत् वर्ष के अधिक शहद उत्पादन करने वाले सशक्त मौनवंशों को मातृ मौनवंशों की श्रेणी में रखते हुए इनसे मौनवंशों का सम्वर्धन सुनिश्चित किया जाय। विभाजित मौनवंशों में गुणवत्तायुक्त नई रानी देने हेतु पूर्व से तैयार की गयी रानी को क्वीन केज के माध्यम से विभाजित मौनवंश में प्रवेश कराया जाय, जिससे कम समय में सशक्त मौनवंश का सम्वर्धन सम्भव हो सके। प्रदर्शन (मधु उत्पादक) मौनालय के ऐसे मौनवंश जिन्हें मातृ मौनवंश की श्रेणी में रखा गया है, उसकी प्रति पूर्ति मातृ मौनालय के मौनवंश से कर लिया जाय। मौनी पत्तिंगे की गिडारों की रोकथाम के लिए मौनवंशों को सुदृढ़ बनाये रखें तथा मौनगृहों की दरारों को बन्द कर दें एवं खाली छत्ता को मौनगृहों से निकाल कर पॉलीथीन में पैक करके रखें, जिससे पुनः प्रयोग में लाये जा सके।

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