Azamgarh news:सड़क पर फर्राटा भरती बुलेट, लेकिन डिजिटल नंबर और बीमा नहीं-दरोगा पर कार्रवाई कहाँ?

खाकी पर कानून का डर नहीं! सरायमीर दरोगा की बुलेट से नियमों की धज्जियां उड़ती देखी गईं

आजमगढ़।पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार के स्पष्ट निर्देश पर जनपद में जगह-जगह सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बिना डिजिटल नंबर प्लेट, वैध बीमा और जरूरी कागजात के वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। आम नागरिकों के चालान काटे जा रहे हैं, वाहन सीज किए जा रहे हैं और भारी जुर्माना वसूला जा रहा है।लेकिन सवाल यह उठता है कि जब नियम तोड़ने वाला खुद खाकी में हो, तब कार्रवाई कौन करेगा?,ताजा मामला आजमगढ़-लखनऊ मार्ग स्थित सरायमीर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक दरोगा जी बुलेट मोटरसाइकिल से फर्राटा भरते नजर आए। चौंकाने वाली बात यह रही कि उनकी बाइक पर डिजिटल नंबर प्लेट नहीं लगी थी। यही नहीं, जब बाइक का ऑनलाइन बीमा जांचा गया तो वह भी फेल पाया गया।स्थानीय लोगों के अनुसार, यही दरोगा जी सरायमीर कस्बे में सुबह से शाम तक वाहन चेकिंग के दौरान यात्रियों और वाहन चालकों का धड़ल्ले से चालान करते देखे जाते हैं।डिजिटल नंबर प्लेट न होने पर आम नागरिकों से 5000 से 10000 रुपये तक का जुर्माना,बीमा न होने पर 2000 से 4000 रुपये तक का फाइन,और कई मामलों में वाहन जप्त तक कर लिया जाता है।लेकिन जब वही नियम दरोगा जी की बुलेट पर लागू होते हैं, तो कानून मौन क्यों हो जाता है?,यह पूरा मामला न सिर्फ पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार के प्रयासों पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि विभागीय अनुशासन और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है।यदि आम जनता से नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती जरूरी है, तो वही सख्ती पुलिसकर्मियों पर भी समान रूप से लागू क्यों नहीं होती?,अब सबसे बड़ा सवाल यह है,बिना डिजिटल नंबर प्लेट और बीमा के सड़क पर दौड़ रही दरोगा की बुलेट का चालान कौन काटेगा?,क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है या खाकी पर नियम लागू नहीं होते?,जनता अब पुलिस प्रशासन से यह अपेक्षा कर रही है कि न्याय और कानून का तराजू सबके लिए बराबर हो, चाहे वह आम नागरिक हो या अधिकारी।

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