Gazipur News: फरवरी में सरसों की खेती में बरतें ये जरूरी सावधानियां

Gazipur News: फरवरी में सरसों की खेती में बरतें ये जरूरी सावधानियां

फरवरी माह के प्रथम सप्ताह में सरसों की फसल सामान्यतः फूल आने और फलियां बनने की अवस्था में होती है। यह अवस्था उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। इस दौरान पाले से बचाव, माहू (एफिड/चेपा) कीट की निगरानी तथा खेत में उचित जल निकासी पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी माह में माहू कीट के प्रकोप की संभावना सर्वाधिक रहती है। यह कीट फूलों एवं फलियों का रस चूसकर फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए। यदि 10 से 15 प्रतिशत से अधिक क्षति दिखाई दे, तो इमिडाक्लोप्रिड या डाईमेथोएट की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करना चाहिए।
जैविक खेती करने वाले किसान नीम तेल या सरसों तेल के घोल का प्रयोग कर माहू कीट पर नियंत्रण पा सकते हैं। फूल आने की अवस्था में खेतों में मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ जाती है, जो परागण के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि करती हैं। ऐसे में दिन के समय तीव्र प्रभाव वाले कीटनाशकों के छिड़काव से बचना चाहिए।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि खेत में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो, क्योंकि अधिक नमी से जड़ों के सड़ने की संभावना बढ़ जाती है। आवश्यकता पड़ने पर सीमित मात्रा में नाइट्रोजन अथवा सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है, लेकिन पूर्ण फूल अवस्था में अधिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए।
इन अनुशंसित उपायों को अपनाकर किसान सरसों की फसल से अधिक सुरक्षित, गुणवत्तायुक्त एवं बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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