Azamgarh News: रामेश्वरम प्रसंग के साथ राम कथा में गूंजा भक्ति रस, माता सीता के आदर्शों का हुआ भावपूर्ण वर्णन

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज थाना अंतर्गत पटवध कौतुक प्राचीन शिव मंदिर परिसर में चल रहे नवदिवसीय श्री मानस महायज्ञ एवं राम कथा के दौरान रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन का आयोजन संपन्न हुआ, जबकि शाम की राम कथा में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे।
प्रातःकालीन कार्यक्रम में विद्वान आचार्य श्रीकांत पांडे जी, राहुल पांडे जी, अरुणों तिवारी जी सहित अन्य विद्वानों द्वारा विधि-विधान से हवन एवं पूजन संपन्न कराया गया। यज्ञ की पवित्र अग्नि और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
शाम को आयोजित राम कथा में कथावाचक ललित गिरी महाराज ने रामेश्वरम प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम की शिवभक्ति और धर्मनिष्ठा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि रामेश्वरम वह पावन स्थल है, जहां भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व भगवान शिव की आराधना कर धर्म और विजय का मार्ग प्रशस्त किया था।
अपने प्रवचन में महाराज ने माता सीता के आदर्श चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सीता जी त्याग, धैर्य, मर्यादा और अटूट पतिव्रत धर्म की सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों और कठिन परीक्षाओं के बावजूद माता सीता ने कभी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। अशोक वाटिका में रहते हुए भी उनका आत्मबल, विश्वास और संयम अडिग रहा, जो आज भी समाज और विशेष रूप से नारी शक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे माता सीता के आदर्शों सहनशीलता, करुणा, संयम और दृढ़ संकल्प को अपने जीवन में अपनाएं, जिससे परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।
कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों, जयघोष और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया और आयोजन को सफल बनाया। अंत में आयोजन समिति द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
पूरे आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर संदेश प्रसारित किया। का मार्ग प्रशस्त किया था।
अपने प्रवचन में महाराज ने माता सीता के आदर्श चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सीता जी त्याग, धैर्य, मर्यादा और अटूट पतिव्रत धर्म की सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों और कठिन परीक्षाओं के बावजूद माता सीता ने कभी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। अशोक वाटिका में रहते हुए भी उनका आत्मबल, विश्वास और संयम अडिग रहा, जो आज भी समाज और विशेष रूप से नारी शक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है।महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे माता सीता के आदर्शों सहनशीलता, करुणा, संयम और दृढ़ संकल्प को अपने जीवन में अपनाएं, जिससे परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।
कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों, जयघोष और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया और आयोजन को सफल बनाया। अंत में आयोजन समिति द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
पूरे आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर संदेश प्रसारित किया।

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