AZAMGARH News:ईद के दिन मस्जिदों में अदा की गई नमाज, हिंदू-मुस्लिम एकता की मांगी गई दुआ
Azamgarh News: Namaz was offered in mosques on Eid day, prayers were sought for Hindu-Muslim unity.

प्रेम प्रकाश दुबे की रिपोर्ट।
निजामाबाद/आजमगढ़। निजामाबाद की मस्जिदों में आज ईद–उल–फितर पर नमाज अदा की गई। मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हुए और नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। सेवइयां खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया गया। नमाज अदा करने वाले लोगों ने बताया कि यह त्यौहार आपसी भाईचारे और प्यार का संदेश देता है। इस दौरान बच्चे भी दुआ मांगते दिखे, कि देश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि यह त्यौहार रमजान के पाक महीने के बाद अमन और भाईचारे का पैगाम लेकर आता है। मुसलमान रमजान–उल–मुबारक के 1 महीने के बाद एक मजहवी खुशी का त्यौहार मनाते हैं। जिसे ईद–उल–फितर कहा जाता है। यह यक्म–शव्वाल–अल–मुकर्रम को मनाया जाता है। ईद–उल–फितर इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन मनाया जाता है।रहमतों और बरकतों का मुकद्दस महीना है रमजान उल मुबारक है।जब मुकद्दस महीना खत्म होता है तो अल्लाह ताला अपने बंदों को ईद उल फितर जैसा त्यौहार देता है और अपने फरिश्तों को तमाम शहरों और गांव में भेजता भेजता है जब वह फरिश्ते आसमान से जमीन पर आते हैं तो इस तरह आवाज देते हैं,ऐ मोहम्मद सलाहों ताला अलैहे वसल्लम की उम्मत उस अल्लाह बारगाह की ओर चलो जो बहुत ज्यादा देने वाला और बड़े से बड़े गुनाहों को माफ करने वाला है,जब ईदगाह और मस्जिदों में दोगाना नमाज पढ़ने के लिए मुसलमान हाजिर होते हैं,तो अल्लाह कहता है ऐ मेरे बंदों मांगो क्या मांगतों हो? आज अपनी आखेरत के बारे में जो कुछ प्रश्न करोगे उसे भी मै पूरा करूंगा।जब तक तुम मेरी फर्माबदरी करोगे मैं भी तुम्हारी गलतियों और गुनाहों को छिपाता रहूंगा।अल्लाह कहता है !तुम अपने घरों की तरफ इस हाल में जाओ कि तुमने मुझे खुश कर दिया और मैं तुमसे खुश हो गया।ईद खुशी का वह दिन है जो रमजान के एक महीना की इबादत के बाद आता है,ईद की तैयारी में ज्यादातर लोग नए नए कपड़े जूते चप्पल खुशबू और घरेलू सामान की खरीदारी में व्यस्त हो जाते हैं। ईद की तैयारी का मकसद सिर्फ यह नहीं होता है कि हम अपनी ही जिंदगियों में खुशी पैदा करे।बल्कि अपनी खुशियों को दूसरों में भी बांटे।इंसानियत की खिदमत करें,गरीब मिस्कीन को दिल से लगाए,कोई भूखा हो तो उसे खाना खिलाए,कोई प्यासा हो तो उसे पानी पिलाए जिसके पैर में जूते चप्पल नहीं हैं उसे जूते और चप्पल दिलाए,किसी का दिल दुखाया हो तो उसे राजी कर ले, ईद इंसान और इंसानियत की सेवा करने का दिन है।हमें अपने दिलों को नफरत,और बोगज व कीना से पाक व साफ रखना चाहिए। ईद की खुशियों में हर व्यक्ति को शामिल करना चाहिए,इसी मकसद के लिए सदक ए फितर अदा किया जाता है ,ताकि समाज मोहल्ला पड़ोस के कमजोर और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों से महरूम न रह जाए।आज निजामाबाद के शाही जामा मस्जिद पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से नायब तहसीलदार नीरज कुमार त्रिपाठी,राजस्व निरीक्षक अनिल कुमार,लेखपाल संजय कुमार सिंह,नगर पंचायत निजामाबाद के सफाई नायब हरेंद्र यादव ड्यूटी पर तैनात रहे।जब तक नमाज अदा नहीं की गई तब तक ड्यूटी पर तैनात रहे।



