वायरल ऑडियो-वीडियो से मचा हड़कंप:आजमगढ़ में CHC में आशा संगिनी भर्ती घोटाला:2 लाख रिश्वत मांगने का आरोप

भर्ती में धांधली का आरोप: बयान बदलवाने की कोशिश से और गहराया विवाद

आजमगढ़:जनपद आजमगढ़ के महाराजगंज विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आशा संगिनी भर्ती को लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले से जुड़े एक वीडियो और आधा दर्जन से अधिक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।वायरल वीडियो में पीड़ित महिला, जो वर्तमान में आशा कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत है, ने बताया कि उसने आशा संगिनी पद के लिए आवेदन किया था और इंटरव्यू भी दिया था। महिला का आरोप है कि केंद्र के अधीक्षक डॉक्टर योगेश कुमार गौतम ने नियुक्ति के नाम पर उससे ₹2 लाख की मांग की थी। महिला के अनुसार, उसने ₹50 हजार की रकम दे भी दी, लेकिन इसके बावजूद उसकी नियुक्ति नहीं की गई।महिला ने यह भी दावा किया कि उसके स्थान पर किसी अन्य अभ्यर्थी की नियुक्ति कर दी गई।

मामले की जानकारी होने पर उसने स्थानीय पत्रकार को बुलाकर अपना बयान दर्ज कराया और कार्रवाई की मांग की।मामले में नया मोड़ तब आया जब महिला द्वारा आधा दर्जन से अधिक ऑडियो भी उपलब्ध कराए गए। इन ऑडियो में कथित तौर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महाराजगंज के अधीक्षक से जुड़े लोगों की बातचीत सामने आई है। एक ऑडियो में अधीक्षक की गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर जयप्रकाश यादव महिला पर फोन के माध्यम से दबाव बनाते हुए सुनाई दे रहा है। वहीं एक अन्य ऑडियो में अधीक्षक स्वयं महिला से बातचीत कर उसे आश्वासन देते हुए सुनाई दे रहे हैं कि “अगली बार आपकी भर्ती कर दी जाएगी।इसके अलावा एक अन्य ऑडियो में एंबुलेंस कर्मी राजकुमार भी महिला से फोन पर बातचीत करते हुए उस पर दबाव बनाने की कोशिश करता हुआ बताया जा रहा है। इन ऑडियो क्लिप्स के सामने आने के बाद पूरे मामले ने और तूल पकड़ लिया है और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।मामले ने उस समय और जोर पकड़ा जब स्थानीय विधायक नफीस अहमद ने इसे सोशल मीडिया पर उठाया। उनके पोस्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। संयोग से उसी दिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का आजमगढ़ दौरा भी था, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।सूत्रों के अनुसार, विधायक के हस्तक्षेप के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधीक्षक द्वारा महिला को बुलाकर उसका बयान बदलवाने का प्रयास भी किया गया, जिससे मामले में अधिकारियों की भूमिका और संदेह के घेरे में आ गई है।वहीं, जब इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) आजमगढ़ से बातचीत की गई तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यदि मामला संज्ञान में आता है तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।हालांकि, जिले में इस तरह के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई जांच तक ही सीमित रह जाती है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो और ऑडियो साक्ष्यों के सामने आने तथा जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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