Azamgarh News:सगड़ी बनेगा कुश्ती का नया गढ़, राष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करने की कवायद तेज

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

सगड़ी बनेगा कुश्ती का नया गढ़, राष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करने की कवायद तेज

आजमगढ़ जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र में पूर्वांचल की गौरवशाली कुश्ती परंपरा को नई पहचान दिलाने और ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इसी क्रम में भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष श्री संजय सिंह ‘बबलू’ ने सोमवार को सगड़ी क्षेत्र के मऊकुतुबपुर गांव पहुंचकर खेल विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की।

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श्री ओंकार राय के आमंत्रण पर उनके पैतृक आवास पर आयोजित बैठक में सगड़ी, आजमगढ़ और मऊ जनपद में कुश्ती खेल को पुनर्जीवित करने, युवाओं को खेलों से जोड़ने तथा उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने पर मंथन किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पूर्वांचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित मंच और संसाधन उपलब्ध कराने की है।

इस दौरान क्षेत्र में पारंपरिक अखाड़ों को सशक्त बनाने, उभरते खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करने की रणनीति पर चर्चा हुई। साथ ही सगड़ी को पूर्वांचल में कुश्ती गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

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श्री ओंकार राय ने कहा कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल सबसे प्रभावी माध्यम हैं। खेल न केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में खेल, कौशल विकास और नवाचार आधारित पहलों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिसमें कुश्ती का विशेष स्थान है।

बैठक में सगड़ी में एक भव्य अंतर्राज्यीय कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। माना जा रहा है कि इस आयोजन से क्षेत्रीय खिलाड़ियों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और युवाओं में कुश्ती के प्रति नया उत्साह पैदा होगा।

भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ‘बबलू’ ने क्षेत्र में खेलों के विकास हेतु हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि आजमगढ़, मऊ और सगड़ी की धरती ने हमेशा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को जन्म दिया है। यदि सुनियोजित प्रयास किए जाएं तो यह क्षेत्र एक बार फिर देश को उत्कृष्ट पहलवान देने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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उनके आगमन की सूचना पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी, कुश्ती प्रेमी, खेलप्रेमी एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने पूर्वांचल की समृद्ध कुश्ती संस्कृति को पुनर्जीवित करने और नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

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