Jharkhand news:क्षणिक निराशा में लिया फैसला छोड़ जाता है जीवनभर का दर्द : विजय शंकर नायक

क्षणिक निराशा में लिया फैसला छोड़ जाता है जीवनभर का दर्द : विजय शंकर नायक

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने युवा पीढ़ी से जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच हिम्मत बनाए रखने और किसी भी संकट की स्थिति में अकेले न रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में असफलता, बेरोजगारी, आर्थिक परेशानी, रिश्तों में तनाव या पारिवारिक विवाद जैसी परिस्थितियां जीवन का अंत नहीं हैं। कोई भी समस्या जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। नायक ने कहा कि आज का युवा प्रतिभाशाली, महत्वाकांक्षी और अपने भविष्य को लेकर सपने देखने वाला है। लेकिन कई बार छोटी-सी असफलता या अचानक उत्पन्न संकट के कारण युवा मानसिक रूप से इतना दबाव महसूस करने लगता है कि वह बेहद नकारात्मक निर्णयों के बारे में सोचने लगता है। ऐसी घटनाओं का प्रभाव केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार को लंबे समय तक गहरे भावनात्मक दर्द से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस मां ने अपने बच्चे को जन्म देने से लेकर उसके पालन-पोषण और भविष्य के लिए अनेक त्याग किए, उसके लिए बच्चे को खोना जीवनभर का खालीपन बन सकता है। इसी तरह पिता भी लंबे समय तक यह सोचते रह सकते हैं कि वे अपने बच्चे की परेशानी को समय रहते क्यों नहीं समझ पाए। घर, कमरे और सामान वही रहते हैं, लेकिन परिवार की खुशियों और सामान्य जीवन में बड़ा बदलाव आ जाता है।

समस्या का समाधान जीवन समाप्त करना नहीं

विजय शंकर नायक ने युवाओं से कहा कि एक परीक्षा का परिणाम उनकी पूरी क्षमता तय नहीं करता। आज रोजगार नहीं मिला तो भविष्य में दूसरा अवसर मिल सकता है। कारोबार में नुकसान हुआ है तो दोबारा शुरुआत की जा सकती है। किसी रिश्ते का समाप्त होना भी जीवन के समाप्त होने का संकेत नहीं है।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदलती हैं और समय के साथ आज का असहनीय लगने वाला दर्द भी कम हो सकता है। इसलिए कठिन समय में कोई भी अपरिवर्तनीय निर्णय लेने के बजाय व्यक्ति को रुकना चाहिए, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करनी चाहिए और आवश्यकता होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए।युवाओं से बोले अपना दर्द अकेले मत सहिए। नायक ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जब उन्हें लगे कि कोई उन्हें नहीं समझ रहा है या वे अत्यधिक दबाव में हैं, तब अकेले रहने के बजाय माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करें। उन्होंने कहा कि मदद मांगना कमजोरी नहीं है। अपनी परेशानी स्वीकार करना, रोना या किसी के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त करना भी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी स्थिति को समझने और उससे बाहर निकलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सफलता और खुशहाल जीवन की तस्वीरों से अपनी तुलना नहीं करने की सलाह दी। नायक ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी यात्रा और अपनी परिस्थितियां होती हैं। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरें किसी व्यक्ति के जीवन की पूरी वास्तविकता नहीं बतातीं।अभिभावक बच्चों से केवल पढ़ाई और नौकरी की बात न करें। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने अभिभावकों से भी बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों से केवल यह न पूछें कि पढ़ाई कैसी चल रही है, कितने अंक आए या नौकरी कब मिलेगी। उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि वे अंदर से कैसा महसूस कर रहे हैं और क्या कोई बात उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को तत्काल समाधान से अधिक किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो बिना डांटे और बिना निर्णय सुनाए उसकी बात सुने। परिवार में संवाद और विश्वास का माहौल युवाओं को कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद कर सकता है।

विजय शंकर नायक ने कहा कि कठिन समय आने पर युवाओं को रुकना चाहिए, स्वयं को संभालना चाहिए, जरूरत हो तो रोना चाहिए, किसी से बात करनी चाहिए और विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए, लेकिन जीवन से हार नहीं माननी चाहिए।उन्होंने कहा, “जब आपको लगे कि सब कुछ खत्म हो गया है, तब स्वयं से कहिए नहीं, मेरी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आज का अध्याय कठिन हो सकता है, लेकिन आने वाला अध्याय आपके जीवन का सबसे सुंदर अध्याय भी हो सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन अनमोल है, उनके सपने महत्वपूर्ण हैं और उनका भविष्य अभी खुला हुआ है। क्षणिक निराशा गुजर सकती है, लेकिन जीवन समाप्त करने का निर्णय पीछे छूट गए परिवार के लिए लंबे समय तक पीड़ा का कारण बन सकता है।

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