आजमगढ़ में असदुद्दीन ओवैसी की हुंकार, 80-20 नहीं 99-1 की होगी लड़ाई: योगी सरकार और अखिलेश यादव पर साधा निशान, शिबली कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाने का किया वादा 

Asaduddin Owaisi's roar in Azamgarh, the fight will not be 80-20 but 99-1: Always targeting Yogi government and Akhilesh Yadav, promised to make Shibli College a university.

आजमगढ़, 11 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी। समाजवादी पार्टी का मजबूत राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी, मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी, युवाओं के भविष्य, बुनकरों की आर्थिक समस्याओं, छात्रों के मुद्दों और आजमगढ़ की ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थाओं की उपेक्षा जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया।निजामाबाद तहसील क्षेत्र में आजमगढ़-वाराणसी हाईवे पर लहरिया पुरवा स्थित जायका दरबार ढाबे के पीछे आयोजित जनसभा में ओवैसी ने कहा कि आने वाले समय में देश की राजनीतिक लड़ाई 80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत की नहीं, बल्कि 99 प्रतिशत बनाम एक प्रतिशत की होगी। उन्होंने आर्थिक असमानता को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि देश और प्रदेश की सत्ता में बैठे नेता एक प्रतिशत संपन्न और प्रभावशाली लोगों के हितों के साथ खड़े हैं, जबकि वह 99 प्रतिशत आम लोगों, गरीबों, मजदूरों, युवाओं और वंचित तबकों की आवाज उठाने के लिए मैदान में हैं।ओवैसी के इस बयान को आजमगढ़ में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और प्रदेश की राजनीति में आर्थिक तथा सामाजिक भागीदारी के मुद्दे को नए सिरे से उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

गरीबी के आंकड़ों का हवाला देकर योगी सरकार पर हमला

जनसभा में असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में गरीबी की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि गरीब लोगों की संख्या के मामले में आजमगढ़ प्रदेश में चौथे स्थान पर है।ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब सरकारी आंकड़ों में गरीबी जैसी गंभीर समस्या सामने आ रही है, तब प्रदेश की राजनीति को 80 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत के नजरिये से क्यों देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता के सामने रोजगार, शिक्षा, कारोबार, महंगाई और आर्थिक असमानता जैसे सवाल हैं, जिन पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि राजनीतिक बहस को धार्मिक आधार पर बांटने के बजाय उन लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जो रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समाज का बड़ा हिस्सा आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है, जबकि संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित लोगों तक पहुंचने का आरोप लगातार लगाया जाता रहा है।उन्होंने 99 प्रतिशत बनाम एक प्रतिशत का नारा देते हुए कहा कि आने वाले समय में संघर्ष आम जनता के अधिकारों और मुट्ठीभर प्रभावशाली लोगों के हितों के बीच होगा। हालांकि, आजमगढ़ में गरीबों की संख्या के मामले में जिले की चौथी रैंकिंग संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी रिपोर्ट और उसके आंकड़ों का विस्तृत सत्यापन आवश्यक है।

योगी, मोदी और अमित शाह पर लगाए आरोप

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं की राजनीति आम जनता के आर्थिक और सामाजिक सवालों के बजाय धार्मिक तथा राजनीतिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है।ओवैसी ने कहा कि वह ऐसी राजनीति की बात करते हैं, जिसमें गरीबों, मजदूरों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को उनका अधिकार मिले। उन्होंने प्रदेश सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए युवाओं के खिलाफ कथित कार्रवाई, छात्रों के उत्पीड़न और मुस्लिम समाज के लोगों पर कथित रूप से फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने के आरोप उठाए।उन्होंने मुस्लिम युवाओं और महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा जेल में बंद किए जाने के मामलों को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए।प्रदेश में एनकाउंटर की कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने सरकार पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और कानून-व्यवस्था के नाम पर अपनाई जा रही नीतियों पर सवाल उठाए। इसके अतिरिक्त, एयरपोर्ट का नाम बदले जाने के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार की आलोचना की।

अखिलेश यादव पर निशाना, मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी का सवाल

आजमगढ़ की जनसभा में ओवैसी ने भाजपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ने लंबे समय से समाजवादी पार्टी को राजनीतिक समर्थन दिया है और पार्टी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और उसके संस्थागत विकास से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।ओवैसी ने PDA की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को केवल वोट देने वाले समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक राजनीतिक ताकत तभी स्थापित होती है, जब उसके लोगों को निर्णय लेने वाली संस्थाओं, सरकार और राजनीतिक नेतृत्व में उचित प्रतिनिधित्व मिले।उनका जोर इस बात पर रहा कि मुस्लिम समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के लिए स्वयं संगठित होना होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने समाज की समस्याओं को दूसरे दलों के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद उठाएं।आजमगढ़ जैसे जिले में, जहां समाजवादी पार्टी की लंबे समय से मजबूत राजनीतिक उपस्थिति रही है, ओवैसी का यह हमला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके संबोधन से यह संकेत मिला कि AIMIM प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व और हिस्सेदारी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

शिबली कॉलेज और दारुल मुसन्निफीन को लेकर अखिलेश यादव से सवाल

ओवैसी ने अपने भाषण में आजमगढ़ की ऐतिहासिक शैक्षणिक और बौद्धिक विरासत का उल्लेख करते हुए शिबली कॉलेज और दारुल मुसन्निफीन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आजमगढ़ की पहचान केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, साहित्य, इतिहास और बौद्धिक परंपरा के लिए भी जाना जाता है।उन्होंने अल्लामा शिबली नोमानी की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि शिबली कॉलेज और दारुल मुसन्निफीन जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, इन संस्थानों ने शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इन्हें आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।ओवैसी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने में मुस्लिम समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन जब शिबली कॉलेज को आर्थिक मदद की जरूरत थी, तब अखिलेश यादव की ओर से कथित तौर पर केवल पांच लाख रुपये की सहायता दी गई। उन्होंने इस राशि का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि आजमगढ़ की इतनी महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्था के विकास के लिए इससे अधिक प्रयास क्यों नहीं किए गए।उन्होंने शिबली कॉलेज और दारुल मुसन्निफीन को और मजबूत बनाने तथा शिबली कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। ओवैसी ने कहा  इंशाअल्लाह शिबली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।उनके इस बयान ने जनसभा में शिक्षा और संस्थागत विकास को राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया। शिबली कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की बात आजमगढ़ के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी एक बड़ी घोषणा के रूप में सामने आई। हालांकि, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विस्तृत योजना, वित्तीय संसाधन, कानूनी प्रक्रिया और संबंधित संस्थाओं की आवश्यक मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।दारुल मुसन्निफीन के संदर्भ में भी ओवैसी ने इसकी ऐतिहासिक और बौद्धिक अहमियत पर जोर दिया। उनका संदेश था कि समाज की तरक्की केवल चुनाव जीतने से नहीं, बल्कि शिक्षा, पुस्तकालयों, शोध और उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने से भी होती है।

मुस्लिम समाज से खुद नेतृत्व तैयार करने की अपील

ओवैसी ने जनसभा में मुस्लिम समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी होगी और राजनीतिक नेतृत्व विकसित करना होगा। उनके अनुसार, यह लड़ाई केवल चुनाव के समय समर्थन देने या राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और सम्मान जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर आगे आना चाहिए। युवाओं को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।ओवैसी ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल मुस्लिम समाज को स्वतंत्र नेतृत्व के रूप में उभरते नहीं देखना चाहते। उन्होंने इस धारणा को चुनौती देते हुए कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को संविधान के दायरे में रहकर राजनीति करने और अपने हितों की बात उठाने का अधिकार है।उन्होंने कहा कि मुसलमान भारत के नागरिक हैं और अपने देश से बेपनाह मोहब्बत करते हैं। उनके मुताबिक, देश के प्रति निष्ठा और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने समाज से संवैधानिक अधिकारों, सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संगठित होने की अपील की।

संभल से चुनाव लड़ने की चुनौती

अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संभल से चुनाव लड़ने की चुनौती देकर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। उन्होंने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए प्रदेश की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण, कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों से जुड़े सवालों को उठाया।इस चुनौती को मुख्यमंत्री के खिलाफ उनके राजनीतिक तेवर के रूप में देखा गया। ओवैसी ने अपने भाषण में यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी पार्टी प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों के सामने अपने मुद्दों के साथ स्वतंत्र विकल्प पेश करना चाहती है।हालांकि, चुनावी चुनौती और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी चुनावों में AIMIM किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती है और उसका प्रभाव किन क्षेत्रों में अधिक दिखाई देता है।

मुबारकपुर के बुनकरों और बनारसी साड़ी उद्योग का मुद्दा

आजमगढ़ जिले की आर्थिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए ओवैसी ने मुबारकपुर के बुनकरों और साड़ी उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने बनारसी साड़ी पर जीएसटी का मुद्दा उठाते हुए बुनकर समुदाय की आर्थिक कठिनाइयों पर चिंता जताई।मुबारकपुर और आसपास के क्षेत्रों में कपड़ा तथा बुनकरी का काम अनेक परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में कारोबार की लागत, बाजार में मांग, कच्चे माल की कीमत और कर संबंधी व्यवस्थाएं बुनकरों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।ओवैसी ने रोजगार और कारोबार से जुड़े सवालों को राजनीतिक चर्चा में शामिल करते हुए कहा कि आम लोगों की आर्थिक समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बुनकर समुदाय के हितों और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।उनके भाषण में यह मुद्दा गरीबी और आर्थिक असमानता की व्यापक चर्चा से जुड़ा रहा। उन्होंने यह संदेश दिया कि राजनीतिक दलों को केवल चुनावी नारों तक सीमित रहने के बजाय उन लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जिनकी आजीविका छोटे कारोबार और पारंपरिक उद्योगों पर निर्भर है।

SIR और निर्वाचन आयोग पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। अपने संबोधन में उन्होंने आयोग के नाम को लेकर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मुद्दे पर ओवैसी ने युवाओं और नागरिकों को अपने मताधिकार के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उनके भाषण का जोर इस बात पर था कि लोकतंत्र में राजनीतिक भागीदारी के लिए नागरिकों के मताधिकार और प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर सतर्कता आवश्यक है।

मोबाइल की रोशनी से समर्थकों में भरा जोश

जनसभा के दौरान ओवैसी ने समर्थकों से अपने मोबाइल फोन की लाइट जलाने की अपील की। मोबाइल की रोशनी के बीच उन्होंने कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों में उत्साह भरने का प्रयास किया। भाषण के दौरान नारेबाजी और समर्थकों की प्रतिक्रिया से सभा का माहौल राजनीतिक रूप से सक्रिय दिखाई दिया।इस दृश्य के जरिए उन्होंने अपने समर्थकों को एकजुटता और राजनीतिक बदलाव का संदेश देने की कोशिश की। जनसभा में शिक्षा, गरीबी, मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी और स्थानीय आर्थिक समस्याओं जैसे मुद्दों को एक साथ उठाकर उन्होंने अपनी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को सामने रखा।

आजमगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश

आजमगढ़ लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में AIMIM की जनसभा को आगामी चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है। ओवैसी ने भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों पर निशाना साधकर यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनकी पार्टी प्रदेश में स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और नेतृत्व स्थापित करना चाहती है।गरीबी के आंकड़ों से लेकर शिबली कॉलेज को विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा तक, उनके भाषण में आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों को राजनीतिक भागीदारी के सवाल से जोड़ा गया। उन्होंने मुस्लिम समाज से केवल किसी राजनीतिक दल का समर्थक बनकर रहने के बजाय अपने नेतृत्व और संस्थागत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

 

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