अखिलेश यादव के लिए हो सकती है चुनावी दिक्कत,बीजेपी के साथ दिखे बागी विधायक

रिपोर्टर रोशन लाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐसा सियासी दांव चला है, जिसने समाजवादी पार्टी (सपा) के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें सत्ता पक्ष के विधायकों में सेंध लगाने की बात कही जा रही थी। मंगलवार को बीजेपी के आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान सामने आई एक तस्वीर ने यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी।दरअसल, बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान अपना दल (सोनेलाल) के नेता और योगी सरकार में मंत्री आशीष पटेल तथा निषाद पार्टी के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद भी बीजेपी के साथ मजबूती से खड़े नजर आए। एनडीए के दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी को बीजेपी ने गठबंधन की एकजुटता के तौर पर पेश किया। सियासी तौर पर इस तस्वीर को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि समाजवादी पार्टी की ओर से लगातार सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों के उसके संपर्क में होने के दावे किए जा रहे थे।

 

एनडीए की एकजुटता ने सपा की रणनीति को दिया झटका

 

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इससे पहले संकेत दिए थे कि पार्टी राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है और सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों को अपने पक्ष में ला सकती है। अखिलेश ने यहां तक कहा था कि अगर सपा के बागी विधायक वापस लौटना चाहते हैं तो पार्टी उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है।हालांकि, चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ तस्वीर कुछ अलग नजर आई। 5 अक्टूबर की शाम सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात और नामांकन के दौरान अभय सिंह तथा राकेश सिंह जैसे बागी विधायकों का बीजेपी खेमे के साथ दिखाई देना सपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया।बीजेपी के नामांकन के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने भी यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर फिलहाल कोई बड़ी दरार नहीं है।

 

बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारे, जातीय समीकरणों का भी रखा ध्यान

 

मंगलवार, 6 अक्टूबर को बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी अजीत वर्मा के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल किया। निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र के दो-दो सेट दाखिल किए। प्रत्येक सेट में प्रस्तावक के तौर पर 10-10 विधायकों के हस्ताक्षर थे।बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन में जातीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। पार्टी की सूची में ओबीसी, एससी, ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।ओबीसी वर्ग से यूपी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह (लोध), बीजेपी ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल (पाल) और श्रुति गंगवार (कुर्मी) को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं अनुसूचित जाति से विद्यासागर सोनकर और प्रियंका रावत को मौका दिया गया है।ब्राह्मण समुदाय से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि क्षत्रिय समाज से राम प्रताप सिंह चौहान को टिकट दिया गया है। आठ उम्मीदवारों की सूची में दो महिलाओं को शामिल कर बीजेपी ने सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ महिला भागीदारी का भी संदेश देने की कोशिश की है।

 

अखिलेश ने कहा- अब ध्यान तीन पर नहीं, 403 पर

 

बीजेपी के उम्मीदवारों के नामांकन और सत्ता पक्ष की एकजुटता के बीच समाजवादी पार्टी ने तीसरे उम्मीदवार को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि “अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।अखिलेश यादव का यह बयान राज्यसभा चुनाव से ज्यादा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर फोकस करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सपा पहले दो उम्मीदवारों को मैदान में उतार चुकी थी, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी अतिरिक्त समर्थन जुटाना चुनौती बनता दिखाई दिया।अखिलेश के बयान पर यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी पलटवार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अभी से 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है।

 

निर्विरोध चुनाव की राह लगभग साफ

 

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने का मंगलवार को अंतिम दिन था। समाजवादी पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं।बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के मैदान में होने से कुल 10 सीटों के लिए 10 ही उम्मीदवार रह गए हैं। यदि अंतिम समय में कोई बड़ा उलटफेर नहीं होता है, तो सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है।राज्यसभा चुनाव के बहाने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। बीजेपी ने जहां एनडीए की एकजुटता और सामाजिक समीकरणों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत दिखाने की कोशिश की, वहीं अखिलेश यादव ने अब अपना ध्यान 2027 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करने का संकेत दिया है। ऐसे में लखनऊ में सामने आई नामांकन की यह तस्वीर आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रह सकती है।

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