जबलपुर:बिना डिग्री चल रहा था अस्पताल, सील भवन से मिलीं 12 हजार की एक्सपायरी दवाएं
Jabalpur: Hospital was running without a degree, expired medicines worth Rs 12,000 were found in the sealed building.
जबलपुर:बेलखाड़ू के पास स्थित सील अश्वनी अस्पताल को ड्रग इंस्पेक्टर ने पुलिस और बीएमओ की मौजूदगी में खोलकर जांच की तो पता चला कि यहां पर बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं रखी हुई है, इतना ही नहीं बच्चों के इलाज से लेकर महिलाओं के गर्भवती होने वाली दवाएं भी मिली है। तीन दिन पहले जिला प्रशासन ने एक युवक की मौत के बाद अस्पताल को सील करते हुए डाक्टर सरिता साहू के खिलाफ जांच शुरू की तो पता चला कि बिना डिग्री के लंबे समय से वो बेलखाड़ू में अस्पताल संचालित कर रही है।मंगलवार शाम अस्पताल पहुंची टीम ने मौके से करीब 12 हजार की दवाएं जब्त की है। जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि बिना डिग्री के अस्पताल चला रही सारिता साहू एलोपैथिक दवाओं से इलाज करती थी, जबकि उन्होंने बंगाली डाक्टरों का डिप्लोमा लिया था।
टीम को सील अस्पताल से 23 प्रकार की दवाएं मिली, जिसमें ज्यादात्तर एक्सपायर थी।
दरअसल बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी शेखर चौधरी (19) को 2 अक्टूबर को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। परिजन उसे इलाज के लिए खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां सुबह तक उसका इलाज किया गया, जिसके बाद परिजन उसे घर ले आए। कुछ देर बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। इसके बाद परिजन उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि सरिता साहू के कहने पर मददगार सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उसे फिर इंजेक्शन देने के साथ ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई।परिजनों के मुताबिक, ड्रिप चढ़ाने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। घटनास्थल पर मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। पुलिस ने मौके से आधी भरी ग्लूकोज की बोतल, ड्रिप, निडिल, इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाइयों के रैपर जब्त किए हैं।
जांच में पता चला कि फर्जी डिग्री से चल रहा था अस्पताल,रजिस्ट्रेशन भी नहीं था।
ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल के साथ बीएमओ डा श्रीपति मिश्रा, बेलखाडू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा टीम के साथ पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 1 घंटे तक अस्पताल में सघन चैकिंग। डीआई के मुताबिक अशवनी अस्पताल में 23 प्रकार की अंग्रेजी दवाएं मिली है, इसके साथ ही कुछ एक्सपायरी दवाएं के साथ ग्लूकोज की ड्रिप भी मिली है। उन्होंने बताया कि यह दवा गर्भवती महिलाएं और बच्चों को दी जाती थी। जांच में यह भी पता चला कि अस्पताल के पास रजिस्ट्रेशन नहीं था, डाक्टर के पास डिग्री नहीं थी। शेखर चौधरी को इलाज के दौरान ड्रिप में जो इंजेक्शन मिलाया गया था वह भी एक्सपायर हो चुका था। सर्चिंग के दौरान पुलिस ने बार-बार अस्पताल संचालिका सरिता साहू को मौके पर बुलाया, पर वह नहीं आई।
जबलपुर से वाजीद खान की रिपोर्ट



