Azamgarh News:श्रीनगर सियरहां में 108 दिव्यांग बच्चों को मिला सहायक उपकरण, चेहरे पर खिली मुस्कान
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
श्रीनगर सियरहां में 108 दिव्यांग बच्चों को मिला सहायक उपकरण, चेहरे पर खिली मुस्कान
भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम कानपुर और बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से हुआ वितरण, दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
आजमगढ़ जनपद के शिक्षा क्षेत्र बिलरियागंज अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय श्रीनगर (सियरहां) के प्रांगण में मंगलवार को दिव्यांग बच्चों के लिए सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए कुल 108 दिव्यांग बच्चों को उनकी दिव्यांगता और आवश्यकता के अनुसार उपकरण वितरित किए गए। सहायक उपकरण पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे, वहीं अभिभावकों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दी।
जिला समन्वयक समेकित शिक्षा संतोष कुमार के नेतृत्व में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम, कानपुर एवं बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से शिविर का आयोजन किया गया। इससे पूर्व 22 अगस्त को दिव्यांग बच्चों की जांच और माप की प्रक्रिया पूरी की गई थी। उसी के आधार पर मंगलवार को पात्र बच्चों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए।
शिविर में बच्चों को 13 छोटी ट्राईसाइकिल, आठ बड़ी ट्राईसाइकिल, एक मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, दो बड़ी व्हीलचेयर, 17 मध्यम आकार की व्हीलचेयर, 13 छोटी व्हीलचेयर, नौ सीपी चेयर, आठ एल्बो क्रच, 12 रोललेटर, 24 टीएल किट, दो ब्रेल किट, एक सुगम केन सहित पीएम श्री योजना के तहत ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और एल्बो क्रच समेत अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त टीएलएम किट और ब्रेल किट भी उपलब्ध कराई गईं।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कमला रानी का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर बृजेश कुमार, सूर्य प्रताप, अर्जुन प्रसाद, मुन्नीलाल, अवधेश पाटिल और लालचंद यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। विद्यालय के समस्त कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।
जिला समन्वयक समेकित शिक्षा संतोष कुमार ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने से उनकी शिक्षा, आवागमन और दैनिक गतिविधियों में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि दिव्यांग बच्चों को सहयोग देकर उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सके।



