आजमगढ़:महिला स्वयं सहायता समूहों की आपदा जोखिम न्यूनीकरण में भूमिका विषय पर एक दिवसीय मण्डल स्तरीय भव्य आयोजन
मण्डलायुक्त एवं जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलन कर किया एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ

आजमगढ़:पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के संबंध में 10 सूत्रीय एजेंडे के अंतर्गत तृतीय एजेंडा बिंदु आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं का नेतृत्व तथा व्यापक सहभागिता का केन्द्रीयकरण पर सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महिला स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप्स वोमेन) की आपदा जोखिम न्यूनीकरण में भूमिका विषय पर उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आजमगढ़ की सहभागिता एवं जिलाधिकारी आजमगढ़ के निर्देशन में हरिऔध कला केंद्र में आयोजित एक दिवसीय मण्डल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ।कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि मण्डलायुक्त श्री मनीष चौहान एवं जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज दीप प्रज्वलन के साथ किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि मण्डलायुक्त मनीष चौहान ने आपदा प्रबन्धन के बारे में किस तरह से बचाव किया जायेगा इस बारे में यहां प्रशिक्षण दिया जायेगा। आपदा के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि यह आजमगढ़ में जब भी कभी आपदा आती है उसके लिए क्या करना है इसके बारे में सोचना हमें जरुरी है, क्योंकि आपदा में कम्युनिकेशन आदि सभी कार्य करना बंद कर देते हैं। मण्डलायुक्त ने बताया कि भूकंप एक प्राकृतिक घटना है जिसमें पृथ्वी के अंदर से ऊर्जा निकलने के कारण तरंगे उत्पन्न होती है जो सभी दिशाओं में फैलकर पृथ्वी को कम्पित करती हैं। इससे जान-माल की क्षति, आधारभूत संरचनाओं जैसे पुल, रेत की पटरियां, भवन आदि की क्षति होती है। उन्होंने बताया कि भूकंप के दौरान शात रहें, लंबी और भारी वस्तुओं से दूर रहें एवं खुले मैदान में जायें। यदि आप घर के अंदर हैं, तो टेबल बेड के नीचे चले जाये या घर में काॅलम पिलर के समीप खडे़ हो जायें। गैर और लाइट बंद कर दें एवं कांच के दरवाजों एवं खिड़कियों से दूर रहें।इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं,बच्चों, बुजुर्गो और दिव्यांग लोगों की मदद करें एवं सभी पालतू जानवरों को खोल दें ताकि वे बाहर भाग सके।जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने कहा कि दैवी आपदा के न्यूनीकरण में आज का प्रशिक्षण कार्यक्रम लम्बा है कुछ ऐसी बातें भी बतायी जाएंगे जिसकी जानकारी आपको नहीं हो सकती।मण्डल के सभी स्वयं सहायता समूह के लोग आये हैं मेरा उन सभी से अनुरोध है कि प्रशिक्षण बहुत अच्छे ढ़ंग प्राप्त करें, केवल औपचारिकताए हीं नहीं निभायें, बल्कि धरातल पर भी कार्य करें। उन्होंने बताया किसी भी आपदा के दौरान बच्चे, वृद्ध व अस्वस्थ व्यक्ति तथा महिलाएं सर्वाधिक संवेदनशील समझे जाते हैं।महिलाओं को आपदा प्रबन्ध से संबंधित प्रशिक्षण देकर समाज के सर्वाधिक संवेदनशील समूह को जागरुक एवं सुरक्षित बनाया जा सकता है।जिला प्रशासन की तरफ से अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्री आजाद भगत सिंह ने सभी आतिथियों और प्रतिभागी महिलाओं को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को विस्तार से समझाया तथा आपदा न्यूनीकरण के क्षेत्र में चलाई जाने वाली परियोजनाओं के बारे मे जानकारी दी। ए0डी0एम0 ने अग्नि दुघर्टना बताया कि अग्नि दुघर्टना होने पर चिल्लाकर या घंटी बजाकर चेतावनी देनी चाहिए, रेत और अन्य आग बुझाने वाले यंत्रों का उपयोग करके आग बुझाएं, मेन स्विच तुरंत बंद कर देना चाहिए, यदि कपड़े जलने लगे तो आग बुझाने के लिए पीड़ित व्यक्ति को जमीन पर लोटना चाहिए, अग्नि दुर्घटना स्थल के आस-पास पाये जाने वाले ज्वलनशील को त्याग देना होगा ताकि आग उन तक न फैलें। मानव जनित आपदा एवं उसके प्रकार के बारे में बताया कि मनुष्य के कार्यो, जो जानबूझकर या अनजाने में किए जाये तथा जिनसे जान-माल की भारी क्षति होती है, को मावन जनित आपदा करते हैं। ऐसे इच्छित या अनिच्छित कार्यो द्वारा जनित आपदाओं से मानव मृत्यु के अलावा सरकारी तथा निजी सम्पत्तियों को भारी हानि होती है।मानव जनित आपदा की इस परिभाषा का और अधिक विस्तार किया जा सकता है। इसके साथ ही अज्ञानता, गलती या मानव निर्मित की विफलता के कारण उत्पन्न आपदाओं घटनाओं या दुघर्टनाओं जिनसे मानव के जान माल की भारी क्षति होती है, को मानव जनित आपदा कहते हैं।मुख्य वक्ता के रूप में आए डॉ मजहर रसीदी ने बताया कि महिलायें परिवार की प्रथम शिक्षक होती है और उन्हे आपदा प्रबंधन के न्यूनीकरण के संबंध में इनसे बेहतर कोई दूसरा ब्रांड एम्बेसडर नहीं हो सकता। क्योंकि महिलायें न केवल अपने बच्चे, परिवार अपितु समाज में भी जागरूकता फैला सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 10 सूत्री एजेंडे के तीसरे बिन्दु आपदा जोखिम प्रबंधन मे महिलाओं का नेतृत्व तथा व्यापक सहभागिता के लिए महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों एवं गतिविधियों के कुशल संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में प्रशिक्षित करते हुए सम्पूर्ण समुदाय को जागरूक और प्रशिक्षित कर विभिन्न आपदाओं से होने वाली जन धन एवं पर्यावरण की हानियों को न्यूनतम किया जा सकता है। इसके साथ श्रीमती अंकिता पदलानी सलाहकार यूनिसेफ ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह की आपदा जोखिम न्यूनीकरण में भागीदारी अति महत्वपूर्ण है क्योंकि महिला समाज का वह अभिनव अंग है जो पूरे परिवार को अपने कंधों पर लेकर चलती है यह भी बताया कि यदि कोई सड़क दुर्घटना होती है तो निगेटिव बात न बोलें, बल्कि पाॅजिटिव बात करें जिससे घायल व्यक्ति का हौसला बढ़ता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है और बार-बार प्रशिक्षण करने से दक्षता आती है तथा साथ ही उन्होंने कई प्रकार की आपदाओं के बारे में जागरुक किया एवं एन0डी0आर0एफ0 टीम के साथ आपदा के बचने के डेमों भी करके दिखायें गये। तथा एन0डी0आर0एफ0 वाराणसी टीम ने बताया गया कि अब 10 हजार आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा स्वयं सहायता महिलाओं को आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया कैसे की जाए पर डेमो प्रस्तुत किया। अग्निकांड के समय त्वरित कार्यवाही और अग्निकांड से बचने के उपायों पर महिला समूहों की सदस्यों को जागरूक किया गया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा सभी प्रतिभागियों को उपलब्ध कराई गई प्रशिक्षण पुस्तिका में जन-जागरूकता हेतु सर्पदंश, आकाशीय बिजली, भूकंप एवं लू प्रकोप विषयक क्या करें व क्या न करें, पर विस्तृत चर्चा की गई है। जिला आपदा विशेषज्ञ आजमगढ़ द्वारा मंडल में विभिन्न प्रकार की आपदाओं के परिदृश्य का प्रस्तुतिकरण किया गया।प्रशिक्षण के प्रश्नोत्तरी सत्र में सही उत्तर देने वाली 5-5 महिलाओं को उपहार देकर पुरुस्कृत किया गया एवं कार्यशाला में समस्त प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, जिला आपदा विशेषज्ञ डॉ चंदन कुमार एवं कार्यक्रम में लगी पूरी टीम को बधाई/ शुभकामनाए दी।समापन के दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व द्वारा आयुक्त महोदय आजमगढ़ मंडल आजमगढ़ परियोजना निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सलाहकार यूनिसेफ आदि को मुमेंटो प्रदान किया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व द्वारा कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई। इस अवसर पर मण्डल के सभी जनपदों से आई हुई स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, मास्टर प्रशिक्षक एवं लेखपाल की लगभग 400 महिलायें उपस्थित थी।



