देवरिया:धर्म की रक्षा के लिए भगवान लेते अवतार

रिपोर्ट: विनय मिश्रा
बरहज,देवरिया:बारात तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नौका टोला बेलडांड़ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कथा व्यास डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र ने कही। उन्होंने कहा कि जब त्रेता युग में इस धरा पर रावण इत्यादि राक्षसों का अत्याचार बढ़ गया लोग दु:की हो गये धरती से यह देखा नहीं गया वह ब़म्हांदि देवों के साथ क्षीर सागर के तट पर जाकर भगवान को पुकारने लगे । उसी समय आकाशवाणी हुई कि कुछ ही समय में दशरथ कौशल्या के यहां पुत्र रुप में अवतार लेकर सारे असुरों का संहार करूंगा तुम सब दे भी मेरी सहायता के लिए जन्म लो । सभी आस्वस्त हो गये । और अपने अपने धाम को गये । समय आने पर चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को मध्यान्ह काल में चतुर्भुज रूप में कौशल्या जी के सामने प्रकट हो गए । मां कौशल्या जी ने भगवान से प्रार्थना कहीं कि आप मेरे लिए दो हाथों वाले बालक बन जाईए । भगवान दो हाथों वाले बालक बन गये और रुदन करने लगे । पूरे अयोध्या में हर्ष की लहर दौड़ गई राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ जी के साथ आकर दर्शन किये और मधू चटाते हुए जातकर्म संस्कार करवाये। चारों भाइयों राम लक्ष्मण भरत शत्रुहन का जन्म हुआ राजा दशरथ दान उपदान किया । आगे चलकर रामजी चारों भाइयों सहित शिक्षा पूरी कर विश्वामित्र जी के साथ गये रास्ते में ताड़का राक्षसी का बंध किये व यज्ञ की रक्षा करते हुए जनकपुरी में जाकर धनुष भंग कर सीता जी से विवाह किये कैकेयी के कहने पर पिता कश की आज्ञां का पालन करते हुवे वन में जाकर अनेक मुनियों के आश्रमों में जाकर सबको साथ किये पंचवटी में सुर्पणखा का नाक कान काटकर व खर दूषण आदि राक्षसों का बांध करके रावण को चुनौती दे दिया । रावण ने छल से सीताजी का हरण कर लंका पुरी में अशोक वाटिका में रख दिया हनुमानजी लंका पुरी में जाकर सोने की लंका को जलाकर सीता जी का समाचार रामजी को सुना दिये । रामजी ने समुद्र पार पुल बांधकर लंका पुरी पहुंचकर अनेक राक्षसों का बध करते हुए रावण को मारकर अयोध्यापुरी में आकर रज कर सारी प्रजा को सुखी कर दिया । इस अवसर पर जिला शाशकिय राजेश मिश्र संतोष मिश्र, सज्जन मणि त्रिपाठी, श्रीनिवास दूबे, संतोष मिश्र, मुन्नी देवी आदि श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।
संवाददाता
बरहज ,देवरिया।



