नगर सहित गांव के जल स्रोत का अस्थित्व समाप्त या बचा-खुचा सुखने के कगार पर

पानी की तलास में जानवर दम तोड़ रहे है।

रिपोर्ट संजय सिंह

रसड़ा (बलिया)इस भीषण गर्मी में जमीनी स्तर पर जल का स्रोत नित्य नीचले स्तर पर जा रहा है वहीं रसड़ा तहसील क्षेत्र में जलगाह जल स्रोत तालाब पोखरो व गढ़ही गढ़हा जो 75 गांवो का यह तहसील क्षेत्र में अतिक्रमण कर, या उसे पाटकर या भरकर अवैध तरीके से मकान अन्य तरह से कब्जा कर अस्तित्व को समाप्त कर दिया गया है। आलम यह कि जो किचिंत गावों मे बचा है वह सुख गया है या सुखने के कगार पर है।हालात यह कि पूर्व में नगर में गावों मे तालाब पोखरा ईनार; गढ़ही, गढढा हुआ करता जिसमे जानवर चऊआ गाय भैंस भेड़ बकरी अन्य जानवर अपना प्यास बुझाते थे बताते है कि भैंस गर्म जानवर है और वे गर्मी के दिनो में गढ्ढा पोखरा या तालाब के पानी में बैठकर अपना शरीर की गर्मी को शांति करते। आज यह स्थिति यस कि नगर का प्रतिनिधि अपने विकास के लिए, नगर के तालाब पोखरे का अस्तित्व को सभाप्त कर चुका है तो गांवो में गावं का प्रधान अपने विकास के लिए अपने यातो किसी अब नया शब्द से नवाजे जाने वाले दबंग या शान सोहरत वाले किसी पापुलर को उसके हवाले कर उन जलगाहो जल स्रतो को धन उगाही कर समाप्त कर दिया गया है या समाप्त करने का कार्य किया जा रहा है।आपको बता दे हमारे देश मे पहले के लोग जल स्रोत जलगाह तालाब पोखरा ईनार पेय जल के लिए तमाम व्यवस्था करते थे जिसमे लोगों के आलावा जानवर भी पानी पीते या अपना प्यास बुझा लिया करते थे।अब तो इस युग मे मिरर्लवाटर मिरर्ल पानी खरीद कर जो तत्व हीन नुकसान प्रद दवा या लिकविड से छना हुआ जल पानी खरीद कर शोकियन पीते है।जिससे जगह जगह मिरर्लवाटर के दुकान खुल चुके है लोग तो इसे खरीद कर प्यास तो बुझा लेते है किन्तु जानवर चऊआ पानी पीने के लिए कहां जाय।वर्तमान में सरकार का फरमान आया है कि सुखे तालाब पोखरो में पानी भरा जाय सवाल यह कि तालाब पोखरा जो बचा है उस गांव प्रधान आज के समय में ट्यूबेल समरसेबल पंप से पानी भरने का कार्य करेगा या उस गांव निकट नाला नदी से पानी लाकर उन तालाब पोखरो को भरने का काम करेगा जिसमे अर्थ यानी धन की खैकारी होगी जिसे भ्रष्टार खत्म करने के बजाय इस सरकार में नया नया आयाम से भ्रष्टाचार का बढ़वा मिलेगा जबकी सरकार चिला चिलाकर कह रही है की भ्रचार को मिटाना है एक कहावत चरितार्थ हो रहा है कांग्रेस का इंदरा जब प्रधान मंत्री थी तो गरीबी मिटाओ यानी गरीबो को मिटाते मिटाते चली गई। अब देखना है कि तहसिल क्षेत्र मे बचे खुचे तालाब पोखरे गढ्ढा गढ़ही में पानी भरने का कितना कारगर होगा और जानवर अपना प्यास बुझा सकेगें या बिन पानी दम तोड़गें।

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