150 साल पुराने ‘कौशल के खेल’ बनाम ‘किस्मत के खेल’ विवाद को हल करने में अमेरिकी-हंगेरियन भौतिक विज्ञानी का मॉडल हो सकता है कारगर

The American-Hungarian physicist's model may be effective in resolving the 150-year-old 'game of skill' versus 'game of luck' controversy

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बरसों से चली आ रही ‘कौशल के खेल’ और ‘किस्मत के खेल’ की कानूनी लड़ाई में एक अमेरिकी-हंगेरियन भौतिक विज्ञानी का मॉडल समाधान पेश कर सकता है जिससे इन दोनों में अंतर स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली, 8 मई। बरसों से चली आ रही ‘कौशल के खेल’ और ‘किस्मत के खेल’ की कानूनी लड़ाई में एक अमेरिकी-हंगेरियन भौतिक विज्ञानी का मॉडल समाधान पेश कर सकता है जिससे इन दोनों में अंतर स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

 

 

दिल्ली स्थित पॉलिसी थिंक टैंक एवम् लॉ एंड पॉलिसी ने हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में बताया कि उसने अमेरिकी हंगेरियन भौतिक विज्ञानी एर्पेड एलो द्वारा शतरंज के लिए विकसित ईएलओ सिस्टम पर आधारित कौशल रेटिंग की एक प्रणाली तैयार की है।

 

 

वर्ष 1867 में बने पब्लिक गैंबलिंग एक्ट से कौशल के खेलों को छूट दिए जाने के बाद से भारत में कौशल के खेलों को परिभाषित करने को लेकर कई कानूनी लड़ाइयां लड़ी गई हैं। उच्चतम न्यायालय ने 1957 में फैसला सुनाया था कि क्रॉसवर्ड कौशल का खेल है।

 

 

पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेम्स की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह गंभीर कानूनी लड़ाई का विषय बन गया है। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे कुछ दांव लगाने वाले ऑनलाइन कौशल के खेलों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाए, लेकिन संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों ने उन्हें रद्द कर दिया।

 

 

एवम् ने स्किल-बेस्ड मैचमेकिंग (एसबीएमएम) नाम का एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिससे ‘कौशल के खेल’ बनाम ‘किस्मत के खेल’ के बीच अंतर स्पष्ट हो जाता है। यह तरीके से खिलाड़ियों को उनके कौशल स्तर के आधार पर आमने-सामने रखा जाता है ताकि संतुलित और प्रतिस्पर्धी मैच सुनिश्चित हो सकें।

 

 

 

एसबीएमएम शतरंज खिलाड़ियों को रेटिंग देने के लिए एर्पेड एलो द्वारा तैयार की गई ईएलओ प्रणाली से प्रेरित है। वर्ष 1970 में अपनाई गई ईएलओ प्रणाली ने शतरंज से इंसानी भावनाओं से संबंधित और मनमाने तत्वों को हटा दिया और एक सांख्यिकीय मॉडल पेश किया जो पूरी तरह से खेले गए खेलों के परिणामों के आधार पर संचालित होता है।

 

 

 

उदाहरण के लिए, यदि 1920 के दशक में ईएलओ प्रणाली मौजूद होती तो तीन बार ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप जीतने के बावजूद गुमनाम रही भारतीय शतरंज प्रतिभा मीर सुल्तान खान को अपना उचित स्थान मिल गया होता। एसबीएमएम उन्नत सटीकता और बहुमुखी प्रतिभा प्रदान करने के लिए ग्लिको और ट्रूस्किल जैसे नए मॉडलों के तत्वों को भी शामिल करता है।

 

 

एवम् लॉ एंड पॉलिसी के संस्थापक शशांक रेड्डी बताते हैं, “एसबीएमएम को लागू करने के लिए एक अच्छी तरह से डिजाइन किए गए कौशल-रेटिंग मॉडल की आवश्यकता होती है जो निष्पक्ष और आकर्षक गेमप्ले सुनिश्चित करने के लिए सापेक्ष गणना, औसत मूल्य प्रतिनिधित्व जैसे कारकों पर विचार करता है ताकि निष्पक्ष और आकर्षक खेल सुनिश्चित हो सके। एक प्रभावी और उपयोग करने में आसान स्किल-रेटिंग मॉडल के चयन में सटीकता और सरलता के बीच संतुलन महत्वपूर्ण है।

 

 

उन्होंने आगे कहा, “भारतीय आरएमजी क्षेत्र के संदर्भ में कानूनी दृष्टिकोण से, एसबीएमएम को लागू करने से ‘कौशल के खेल’ बनाम ‘किस्मत के खेल’ के बीच फर्क करने में मदद मिलती है। दूसरे, नीतिगत दृष्टिकोण से, निष्पक्ष और जिम्मेदार गेमिंग प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन आरएमजी में एसबीएमएम आवश्यक है।”

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