पूर्वांचल में नहीं चली बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग

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रिपोर्टर अजीत कुमार सिंह बिट्टू जी ब्यूरो चीफ हिंद एकता टाइम्स

बलिया। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा पूर्वांचल में हार का कारण तलाशेगी, जिसको लेकर भाजपा के अन्दरखानों में चर्चा यह हो रही है कि पूर्वांचल की सीटों पर भाजपा कैसे सपा से पराजित हो गयी। इस वजह का कारण भाजपा तलाश करेगी। पूर्वांचल में बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग कैसे फेल हो गया, इसको भी लेकर भाजपा मंथन में लगी हुई हैं।

 

 

 

लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा ने पूर्वांचल के सीटों को एक बार फिर अपने झोली में लेने के लिए शोसल इंजीनियरिंग पर विशेष जोर दिया था और पूर्वांचल के जाने-माने नेताओं को एनडीए में शामिल कर के एक कोशिश किया था, लेकिन उनके मंसूबे पर पानी फिर गया। लोकसभा चुनाव में पार्टी को जितना फायदा मिलना चाहिए नहीं मिला। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बेटा अरविन्द राजभर घोषी से चुनाव हार गये और यहां से सपा प्रत्याशी राजीव राय लगभग डेढ़ लाख वोटो से जीते। वहीं दूसरी तरफ निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद संत कबीर नगर से हार गये। अब इस हार के पीछे यह माना जा सकता है कि भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग और उनके नेता का प्रभाव अब उनके समाज से हटा है।

यहीं वजह है कि चुनाव में पराजित होना पड़ा। यही नहीं पूर्वांचल की बलिया सीट जो 2019 में भाजपा के झोली में था वह भी हार गयी। 2024 के चुनाव में बलिया की सीट सपा के झोली में चला गया। वहीं सलेमपुर, आजमगढ़, चंदौली, जौनपुर की भी सीटे भाजपा हार गयी और यह सीटे सपा के झोली में चली गयी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पूर्वांचल में एक बार फिर बढ़त बनाने के लिए और भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिले इस ओर कदम रखते हुए सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर व घोसी से विधानसभा उप चुनाव हारे दारा सिंह चौहान को एक बार फिर मंत्री बनने का अवसर देते हुए उन्हें योगी सरकार में मंत्री पद दिलाने में विशेष पहल की और वह मंत्री भी बने। लेकिन लोकसभा चुनाव में योगी के इन मंत्रियों का अपने समाज पर विशेष असर नहीं दिखा जिसकी वजह से इनके उम्मीदवार हार गये। साथ ही पूर्वांचल की कई सीटों पर भाजपा को विजय नहीं दिला पाये। इसको लेकर भाजपा के अंदरखानों में राजभर समाज के नेता सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, चौहान समाज के नेता दारा सिंह चौहान व निषाद समाज के नेता संजय निषाद को लेकर चर्चाएं यह हो रही है कि इनका जादू अब इनके समाज पर नहीं चल पाया।

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