हर दिन अस्पताल की इमरजेंसी में 50- 60 नए मरीज पहंुच रहे, प्रचंड गर्मी से बढ़ी

रिपोर्टर अजीत कुमार सिंह बिट्टू जी ब्यूरो चीफ हिंद एकता टाइम्स
बलिया। तापमान में लगातार इजाफा से सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। हर दिन अस्पताल की इमरजेंसी में 50- 60 नए मरीज पहुंच रहे हैं। इन दिनों उल्टी दस्त, तेज बुखार, ब्लडप्रेशर, सिरदर्द, चक्कर वाले गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सामान्य दिनों में मरीजों की संख्या करीब 90 रहती है, लेकिन बीते एक सप्ताह में 160 के पार पहुंच गई है। इसमें 60 से अधिक मरीज मौसमी बीमारियों के पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी कक्ष फुल हो गया है। बेड के अभाव में मरीजों को जमीन व स्ट्रेचर पर इलाज हो रहा है। निजी अस्पताल व क्लिनिक में भी मरीजों की भीड़ दिख रही है। चिलचिलाती गर्मी व उमस के कारण सबसे ज्यादा हीट स्ट्रोक, ब्लडप्रेशर, सिरदर्द, चक्कर वाले मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी में प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों को वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है।
इमरजेंसी के आठ बेड पर इलाज : जिला अस्पताल इमरजेंसी के ऊपर प्रथम तल पर हीट स्ट्रोक मरीजों को राहत देने के लिए बना 10 बेड का कोल्ड वार्ड बंद था। दिन चढ़ने के साथ मरीजों की संख्या में इजाफा होता नजर आया। तेज बुखार, डायरिया व हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित सबसे ज्यादा इलाज कराने पहुंचे। प्राथमिक इलाज के बाद हीट स्ट्रोक लक्षण वाले मरीजों को कोल्ड वार्ड में भर्ती करने की जगह इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए दो कमरों में आठ बेड लगाए गए हैं। माइनर ओेटी में पांच बेड अतिरिक्त हैं। मरीजों की भीड़ बढ़ने से बेड कम पड़ जा रहे हैं। मरीजों को स्ट्रेचर कुर्सी या जमीन पर बैठाकर इलाज करना पड़ रहा है। अचानक अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ने से चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान हैं।
16 बेड की इमरजेंसी में हर दिन 50 नए मरीज : जिला अस्पताल की इमरजेंसी 16 बेड की है। बुधवार को पिछले बारह घंटे में 24 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। इसमें करीब 15 मरीज तो गर्मी से होने वाली समस्याओं से पीड़ित थे। इसमें बुजुर्ग, महिलाएं व युवा शामिल रहे। ईएमओ डा. डीपी गुप्ता ने बताया की पिछले चार-पांच दिन से रोज 50 -60 नए मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों की स्थिति को देखते हुए उनको संबंधित वार्डों में भी शिफ्ट किया जाता है। इमरजेंसी में बेड कम पड़ जा रहे हैं। मरीजों का उपचार करने के साथ ही बचाव के को लेकर जागरूक किया जा रहा है।



