भारतीय संस्कृति का प्राण है यज्ञ :- रामबली महराज

रसड़ा में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की तैयारियां पहुंची अंतिम चरण में

रिपोर्टर संजय सिंह

रसड़ा (बलिया) यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण व वैदिक धर्म का सार है। यज्ञ से मानव जीवन के लिए अनेक दिव्य प्रेरणाएं संवाहित होती हैं। मानव का यह परम कर्तव्य है कि वह मात्र स्वार्थ सिद्धि के लिए ही प्रयास न करता रहे बल्कि परोपकार मय जीवन व्यतीत करे तभी लोक मंगल की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। उपर्युक्त बातें रसड़ा में आयोजित होने वाले श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के संयोजक एवं यज्ञकर्ता रामबली महराज ने बुधवार को एक वार्ता में वार्ता करते हुए कहा। उन्होंने बताया कि श्रीनाथ बाबा मंदिर रसड़ा के रालमलीला मैदान में 25 जून 27 जून तक चलने वाले इस विशाल श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस महायज्ञ के लिए विहंम मंडप, प्रवेश द्वार, तोरण द्वार, पुस्तक प्रदर्शनी, प्रवचन पंडाल आदि की तैयारियां अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि 25 जून को शुभ कलश यात्रा के साथ यह महायज्ञ का आगाज होगा और 26 को पंचाग पूजन एवं मंडप प्रवेश जबकि 27 जुन को अरण्यी मंथन एवं अग्नि स्थापना तथा 3 जुलाई को 2024 को पूर्णाहूति होगी। उन्होंने श्रद्धालु जनो से इस महायज्ञ को सफल बनाने की अपील की है।

 

रसड़ा के रामलीला मैदान में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ हेतु तैयार किया जा रह भव्य मंडप स्थल।

 

रसड़ा रामलीला मैदान में बना भव्य प्रवेश द्वार।

Related Articles

Back to top button