भारतीय रेलवे स्टेशनों से रेल नीर की बोतलें ग़ायब

रिपोर्टर अजीत कुमार सिंह बिट्टू जी ब्यूरो चीफ हिंद एकता टाइम्स
बलिया। भारतीय रेलवे सहित स्टेशन से रेल नीर की बोतलें गायब हैं। कभी ये बोतलें ट्रेन में सफर करने की पहचान होती थीं। साथ ही लोगों को शुद्ध पानी पीने का भी अहसास होता था, लेकिन अब रेल नीर की बोतलें छपरा से लेकर कानपुर स्टेशन पर नहीं दिख रही हैं। रेलवे ने स्टेशनों व ट्रेनों में यात्रियों को शुद्ध बोतल बंद पानी उपलब्ध कराने के लिए अपना उत्पादन प्रारंभ किया था। इसे रेल नीर का नाम दिया गया था। वर्तमान में स्टेशन की कैंटीन से तो यह गायब ही है, अधिकांश ट्रेनों में भी नहीं बेचा जा रहा है। एक समय पर रेल नीर रेल यात्रा की पहचान थी। जब सफर करके कोई लौटता था तो उसके हाथ में ये बोतल यात्रा की पहचान होती थी। क्योंकि आम बाजार में यह पानी उपलब्ध नहीं था। अब कैंटीन संचालकों ने अधिक लाभ कमाने के लिए इसका उपयोग बंद कर दिया। रेलवे ने रेल नीर के अलावा अन्य ब्रांडों के पानी को भी सत्यापित किया है।
नाम नहीं छापने की शर्त पर कर्मचारी ने बताया कि रेलवे अधिकारियों की मिली-भगत से कारोबार चल रहा है नीर की बोतलें 15 रुपए में बेचीं जाती थी जबकि अन्य ब्रांड का पानी बोतल 20 में बेची जाती है। आईआरसीटीसी द्रारा रेल नीर की बोतल थोक में 11 रुपए में दी जाती थी इसमें कैटरिंग द्रारा 15 रुपया में बेचा जाता है। ऐसे में एक बोतल पानी बेचने पर वेंडर को 4 रुपये कमीशन मिलता है। जबकि लोकल ब्रांड का बोतल बंद पानी बेचने पर दुगुना यानी 10 तक कमीशन मिलता है। ज्यादा कमीशन के चक्कर में लोकल ब्रांड का पानी बेचते हैं। आप समझ सकते कि लोकल पानी में सभी की हिस्सेदारी तय है तभी तो रेल नीर दूर दूर तक दिखाई नहीं पड़ता है। इस पूरे मामले पर वाराणसी डीआरएम से ध्यान आकृष्ट कर उनका पक्ष जानना कि ऐसा क्यों शुक्रवार को दोपहर 12 बजे डीआरएम वाराणसी को फ़ोन किया मगर उन्होंने फ़ोन उठाने की जहमत नहीं उठाया। हालांकि पूर्व डीआरएम विजय पंजियार व रामाश्रय पाण्डेय जी जब भी फ़ोन करता था तुरंत रिसीव कर संतुष्ट जनक बातचीत करते हुए कारवाई भी करते थे । मगर जबसे श्रीवास्तव जी आएं हैं फ़ोन उठाने की जहमत नहीं उठाते।



