पेइचिंग कढ़ाई का विकास

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बीजिंग, 21 जनवरी (आईएएनएस)। पेइचिंग कढ़ाई चीन की राजधानी पेइचिंग की अनोखी कढ़ाई है, जिसे राजमहल की कढ़ाई भी कहा जाता है। प्राचीन काल में इसके जरिए दरबार में सेवा की जाती थी। पेइचिंग कढ़ाई करने के लिए बेहतरीन रेशम और प्राकृतिक रेशम धागा का इस्तेमाल किया जाता है।

वर्ष 2014 में पेइचिंग कढ़ाई राष्ट्रीय गैरभौतिक सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल की गई। पेइचिंग कढ़ाई की उत्तराधिकारी ल्यू श्याओयेन इसका विकास करने में जुटी हैं। कढ़ाई की सुई ऊपर-नीचे उड़ती है और एक मोटा पेओनी पाउच धीरे से दिखाई देता है। जब आप हाथों से इसे छूते हैं, तो इसकी परिपूर्णता महसूस कर सकते हैं। यह पेइचिंग कढ़ाई की विशेषता है।

ल्यू श्याओयेन के दादा एक दर्जी हैं। वे बचपन से ही अपने दादा जी के साथ सिलाई-कढ़ाई का काम करती आ रही है। कढ़ाई के प्रति प्रेम और दृढ़ता के चलते ल्यू श्याओयेन ने कई मास्टरों से पेइचिंग कढ़ाई का शिल्प सीखा और अब वे खुद एक मास्टर बन गई हैं।

उच्च लागत वाली पेइचिंग कढ़ाई को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ल्यू श्याओयेन प्रयास कर रही हैं। उन्होंने पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन को मिश्रित कर आम उपभोक्ताओं के लिए उपयुक्त उत्पाद विकसित किए। उनके द्वारा बनाई गई कान की बालियां और छोटा बैग जैसे उत्पाद उपभोक्ताओं में बहुत लोकप्रिय हैं।

अब ल्यू श्याओयेन पूरे चीन में आयोजित अमूर्त सांस्कृतिक विरासत बाज़ार, विदेशी सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और वेबकास्ट रूम आदि में पेइचिंग कढ़ाई का प्रचार-प्रसार करती हैं। उनके द्वारा खोले गए प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार हो रहा है। इससे न सिर्फ पेइचिंग कढ़ाई आम लोगों तक पहुंची है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी इससे अतिरिक्त आय हासिल हो रही है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

–आईएएनएस

एबीएम/

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इनपुट. आईएएनएस के साथ

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