भरत, चरित्र की कथा सुन भाउक हुए श्रद्धालु।
भरत, चरित्र की कथा सुन भाउक हुए श्रद्धालु।
अमिट रेखा,बरहज देवरिया।हनुमान मंदिर बरहज में चल रहे श्री राम कथा में कानपुर से पधारी साध्वी सुश्री निलेश शास्त्री ने भरत, चरित्र की कथा का का रसपान करते हुए कहा कि संसार में भरत , जैसा भाई होना आज के समय में बड़ा ही मुश्किल है , एक तरफ अगर भगवान श्री राम ने अपने जीवन को 14 वर्षों तक बन में रहकर बिताया वही बड़े भाई का अनुसरण करते हुए अयोध्या की राज सत्ता को त्याग कर निरंतर 14 वर्ष तक नंदीग्राम में तपस्वी के देश में रहकर कठोर साधना करते हुए अवध की राजगद्दी को सजा रखा और भगवान के चरण पादुका से आदेश लेकर राज सट्टा का संचालन किया तभी तो गुरु वशिष्ठ ने कहा तात भरत तुम सब विधि साधु रामचरण अनुराग अगाधू 14 वर्षों के अंतिम दिन अपने भाई की प्रतीक्षा में भरत व्याकुल हो उठे थे और भरत ने कहा कि अगर भैया राम सूर्यास्त तक अवध में नहीं आ जाएंगे तो मैं अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूंगा धीरे-धीरे शाम का समय होने लगा लेकिन प्रभु के आगमन की सूचना भरत को अभी नहीं मिली थी पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं भरत,कि दशा एक बिरही के रूप में हो गई थी
राम विरह सागर मह भरत मगन मन इसी बीच विप्र का वेश धारण करके हनुमान जी अयोध्या आए और भारत को राम लक्ष्मण और सीता सहित अयोध्या आने का शुभ संदेश दिया जिस पर भरत जी ने कहा तात कवन कहां ते आए आए मोही प्रिया वचन सुनाएं,, जिस पर हनुमान जी ने कहा कि रिपु रंन जीत सुजस सुर गावत, सीता अनुज सहित प्रभु आवत। इतना सुनते ही भरत जी उठ खड़े हुए और हनुमान जी को हृदय से लगा लिया भरत के अंदर राम के प्रति कूट-कूट कर सेवा के भाव भरे हुए थे संसार में सेवक होना बड़ा कठिन काम है इसीलिए गोस्वामी जी ने कहा की सिर भर जाऊं उचित अस मोरा, सबसे सेवक धर्म कठोरा । हनुमान मंदिर के मंहत श्री 1008 के श्री मारूति जी महाराज उर्फ त्यागी बाबा, सीमा शुक्ला, राम आशीष यादव, रामाशंकर यादव, रामायण यादव, उमेश चंद चौरसिया, सोनू भारद्वाज, चंद्रभान तिवारी, रमाशंकर, श्याम सुंदर दास, प्रभाकर शुक्ला सीमा देवी ,रजवंती देवी, कुसुम ,सरिता देवी, बदामी देवी, सहित नगर एवं क्षेत्र के सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।


