रसड़ा रामलीला में माता जानकी का हरण एवं जटायु मुक्ति लीला का हुआ सजीव मंचन
रसड़ा(बलिया)। रामलीला मैदान में छोटी काशी की ऐतिहासिक रामलीला के सातवें दिन रावण द्वारा माता जानकी का हरण एवम जटायु मुक्ति लीला का सजीव मंचन किया गया। उपस्थित हजारो श्रद्धालु लीला देख भाव-विभोर हो उठे। खरदूषण का वध किये जाने का समाचार मिलते ही लंकापति रांवण क्रोधित हो उठता है। उसने बदला लेने के लिये स्वयं पंचवटी चल देता है। रावण वेश बदल कर छल पुर्वक माता जानकी का हरण कर पुष्पक विमान से लंका के तरफ चल देता है। माता जानकी द्वारा आकाश मार्ग से बचाओं बचाओ की आवाज सुनकर गिद्धराज जटायु माता जानकी के आवाज को पहचान जाते है। रास्ते में ही खड़ा होकर जटायु रावण के विमान को रोककर माता जानकी को मुक्त करने की बात करते है लेकिन रावण मानता नही है। रावण एवम जटायु में भयंकर युद्ध होता है। रावण खड़ग का प्रहार कर जटायु के पंखां को काटकर मरणासन्न कर देता है। जिससे वे जमीन पर गीरकर जीवन और मौत से जूझ रहे होते है। इधर मारिच बने मृग का वध कर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण पंचवटी लौटते है तो माता जानकी को गायब देख व्यथित हो जाते है। माता जानकी की खोज में प्रभु श्रीराम एवम लक्ष्मण निकल पड़ते है जहां गिद्धराज जटायु से मुलाकात होती है। जटायु ने प्रभु श्रीराम को सारी कहानी बताकर गिद्धराज जटायु परम धाम को चले जाते है। उनकी भक्ति देख प्रभु श्री राम अपने हाथों से जटायू को स्वर्ग भेजते है।



