Deoria news, बिन सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी
बिनु सत्संग बिबेक न होई।
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥
आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी।
देवरिया। ग्राम तेलिया कला में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन, भागवत कथा के रस को कथा सुनाते हुए सत्संग की महिमा पर कहा कि
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना सत्संग सहज में नहीं होता। सत्संगति आनंद कल्याण और की जड़ है। सत्संग की सिद्धि ही फल है और सभी साधन तो फूल हैं अर्थात सत्संग के बिना व्यक्ति सही-गलत का भेद नहीं कर सकता और न ही सही निर्णय लेने की बुद्धि विकसित कर सकता है। श्री रामजी की कृपा के बिना, संतों का संग या सत्संग सहजता से प्राप्त नहीं हो सकता। सत्संग ही समस्त शुभ और सुखों का मूल कारण है। इसकी प्राप्ति ही सच्चा फल है, जबकि इसे प्राप्त करने के सभी प्रयास पुष्प के समान हैं। कथा के दौरान मुख्य यजमान विजय प्रताप सिंह एवं आनंदी सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुरेश सिंह ,चंद्रभूषण सिंह, अरुण कुमार सिंह, अशोक सिंह, सत्य प्रकाश सिंह ,सत्येंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह, अनुराग सिंह सहित क्षेत्र एवं गांव के श्रीमद् भागवत कथा के रसिक श्रद्धालु जन काफी संख्या में उपस्थित रहे।



