MauNews:डीआरएम ऑफिस में बसंत पंचमी पर निराला जी एवं सुभाष चंद्र बोस को अर्पित किया गया श्रद्धासुमन
मऊ।वाराणसी ।वाराणसी मंडल के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के हिंदी वाचनालय में आज 23 जनवरी,2026 को बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जयंती कार्यक्रम एवं माता सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार एवं निजी सचिव, मंडल रेल प्रबंधक रमेश कुमार साह द्वारा माता सरस्वती एवं निराला जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। तदुपरांत सभी कर्मचारियों ने पुष्पांजलि देते हुए हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले साहित्यकार सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनकी प्रमुख रचनाओं का पाठन किया। श्रीमती अनीता पांडे, मुख्य कार्याधी, श्रीमती अलका श्रीवास्तव, कार्याधी एवं प्राची कुमारी, अवर लिपिक के मधुर कंठ से सरस्वती वंदना का गायन किया गया।
राजभाषा विभाग से वरिष्ठ अनुवादक श्रीमती पूनम त्रिपाठी ने स्वागत संबोधन एवं कार्यक्रम संचालन किया गया। वरिष्ठ अनुवादक अमित कुमार साव ने स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी पर भी प्रकाश डाला और स्वरचित गीत की प्रस्तुति की गई। श्रीमती नीरू अवस्थी, मुख्य कार्याधी द्वारा उनके स्वरचित कविता की प्रस्तुति की गई। कनिष्ठ अनुवादक श्रीमती दिव्या शर्मा निराला जी की व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ अनुवादक अमित कुमार साव ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया। वाराणसी मंडल के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के हिंदी वाचनालय में बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती वंदना की गई साथ ही हिंदी जगत के प्रख्यात साहित्यकार सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी की जयंती मनाई गई । कार्यक्रम का शुभारम्भ जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार द्वारा माँ सरस्वती एवं ‘निराला’ जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया । तदुपरांत सभी कर्मचारियों ने पुष्पांजलि देते हुए हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले साहित्यकार सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनकी प्रमुख रचनाओं का पाठन किया।
इस अवसर राजभाषा विभाग से वरिष्ठ अनुवादक श्रीमती पूनम त्रिपाठी ने बताया कि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की पहली नियुक्ति महिषादल राज्य में ही हुई थी जहाँ उन्होंने १९१८ से १९२२ तक यह नौकरी की। उसके बाद संपादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य की ओर प्रवृत्त हुए। १९२२ से १९२३ के दौरान कोलकाता से प्रकाशित ‘समन्वय’ का संपादन किया, १९२३ के अगस्त से मतवाला के संपादक मंडल में कार्य किया। इसके बाद लखनऊ में गंगा पुस्तक माला कार्यालय में उनकी नियुक्ति हुई जहाँ वे संस्था की मासिक पत्रिका सुधा से १९३५ के मध्य तक संबद्ध रहे। १९३५ से १९४० तक का कुछ समय उन्होंने लखनऊ में भी बिताया। इसके बाद १९४२ से मृत्यु पर्यन्त इलाहाबाद में रह कर स्वतंत्र लेखन और अनुवाद कार्य किया। उनकी पहली कविता ‘जन्मभूमि’ प्रभा नामक मासिक पत्र में जून १९२० में, पहला कविता संग्रह १९२३ में अनामिका नाम से, तथा पहला निबंध ‘बंग भाषा का उच्चारण’ अक्टूबर १९२० में मासिक पत्रिका सरस्वती में प्रकाशित हुआ। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछन्द के प्रवर्तक भी माने जाते हैं। १९३० में प्रकाशित अपने काव्य संग्रह परिमल की भूमिका में उन्होंने लिखा है-
(“मनुष्यों की मुक्ति की तरह कविता की भी मुक्ति होती है।” मनुष्यों की मुक्ति कर्म के बंधन से छुटकारा पाना है और कविता की मुक्ति छन्दों के शासन से अलग हो जाना है। जिस तरह मुक्त मनुष्य कभी किसी तरह दूसरों के प्रतिकूल आचरण नहीं करता, उसके तमाम कार्य औरों को प्रसन्न करने के लिए होते हैं फिर भी स्वतंत्र है ।
इस अवसर पर कार्मिक विभाग से श्रीमती नीरू अवस्थी, परिचालन विभाग से पूनम श्रीवास्तव, गायत्री यादव, आरती कुमारी, उर्मिला गुप्ता राजभाषा विभाग से श्रीमती पूनम त्रिपाठी, अमित कुमार साव, दिव्या शर्मा, यांत्रिक (समाडि) से श्रीमती अनीता तिवारी, श्रीमती आरती वर्मा, श्रीमती पूनम तिवारी, श्रीमती आशा सिंह, श्रीमती अंजू मिश्रा, संरक्षा विभाग से श्रीमती रीना सिंह एवं बड़ी संख्या में पर्यवेक्षक एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहें। कार्यक्रम के अंत में राजभाषा विभाग से श्रीमती पूनम त्रिपाठी ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उक्त जानकारी अशोक कुमार जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी ने दी।



