Azamgarh News: प्रदेश के गन्ना किसानों को प्राप्त सरकारी सुविधाओं से हो रही है आय में वृद्धि

आजमगढ़: 27 जनवरी, 2026
गन्ना और चीनी उत्पादन भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। भारत विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। चीनी उद्योग देश के सबसे महत्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योगों में से एक है। यह गन्ना किसानों के परिवारों सहित गन्ना क्षेत्र के कृषि मजदूरों, कुशल कारीगरों, ढुलाई के वाहनों आदि के आजीविका के साधन हैं। गन्ना एक नकदी फसल होने के नाते प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए काफी फायदेमंद रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित करते हुए उन्हें लाभान्वित किया है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। वस्तुतः चीनी मिलें व गन्ना खेती प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास की प्रमुख धुरी है। विगत पेराई सत्र 2024-25 में प्रदेश में 29.51 लाख हेक्टेयर में गन्ना खेती की गयी, जो चीनी मिलों के लगभग 47 लाख गन्ना आपूर्तिकर्ता किसानों के परिवार की आजीविका का साधन है। गत सत्र 2024-25 में प्रदेश में संचालित कुल 122 चीनी मिलों में उ.प्र. राज्य चीनी निगम की 03, उ.प्र. सहकारी चीनी मिल्स संघ की 23 और निजी क्षेत्र की 96 चीनी मिलों द्वारा 956.09 लाख टन गन्ने की पेराई कर 92.45 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। वर्तमान सत्र 2025-26 में 119 संचालित मिलों द्वारा अबतक कुल 403.45 लाख टन गन्ने की पेराई करते हुए 39.22 लाख टन चीनीका उत्पादन किया जा चुका है।
प्रदेश की चीनी मिलों की पेराई क्षमता 8.48 लाख टन प्रतिदिन है। प्रदेश की चीनी मिलों के औद्योगिक पुनरुद्धार के क्रम में पिपराइच, मुण्डेरवां, रमाला में नई चीनी मिलें स्थापित की गयी तथा 44 से अधिक चीनी मिलों का आधुनिकीकरण किया गया है। जिससे अब तक कुल 1,24,500 टी. सी.डी. अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। मिलों के आधुनिकीकरण और औद्योगिक पुनरुद्धार से 10 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। विगत 09 वर्षों में लगभग रु0 6,924 करोड़ का अतिरिक्त पूंजी निवेश किया गया है। वर्तमान सरकार के गठन से आज तक (वर्ष 2017 से 2025 तक) प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य रु0 3,01,942 करोड़ का भुगतान कराया गया है। गन्ना मूल्य भुगतान के कारण ग्रामीण बाजारों में प्रत्येक पेराई सत्र में 35000 करोड़ रुपये से अधिक का सर्कुलेशन होता है।
प्रदेश में ससमय गन्ना मूल्य का भुगतान हो रहा है। वर्तमान सरकार द्वारा वर्ष 2017 से अब तक गन्ना किसानों को रू0 3,01,942 करोड़ से अधिक का रिकार्ड गन्ना मूल्य का भुगतान कराया गया है। यह भुगतान इसके पूर्व के 22 वर्षों (1995 से 2017 तक) के सम्मिलित गन्ना मूल्य भुगतान रू0 2,13,519 करोड़ से भी रू0 88,423 करोड़ अधिक है। गन्ना मूल्य भुगतान समय से कराने हेतु वर्ष 2017 से एस्क्रो एकाउन्ट की व्यवस्था लागू की गयी, जिससे चीनी मिलों में गन्ना मूल्य मद की धनराशि के व्यावर्तन पर पूर्ण अंकुश लगा है। वर्तमान व आगामी वित्तीय वर्ष में सहकारी तथा निगम क्षेत्र की चीनी मिलों के गन्ना मूल्य भुगतान हेतु रु 475 करोड़ का बजट रखा गया है।
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गन्ना मूल्य दरों में वृद्धि की गई है। किसान हित में प्रदेश सरकार द्वारा पेराई सत्र 2017-18 में गन्ना मूल्य की दरों में रु0 10 प्रति कुन्तल की वृद्धि की है। पेराई सत्र 2021-22 में गन्ना मूल्य की दरों में रु0 25 प्रति कुन्तल की वृद्धि, पेराई सत्र 2023-24 में गन्ना मूल्य की दरों में रु0 20 प्रति कुन्तल की वृद्धि तथा पेराई सत्र 2025-26 हेतु गन्ना मूल्य की दरों में 30 रुपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की गयी है, जिसकी दरें अगेती प्रजातियों के लिए रु0 400 प्रति कुन्तल, सामान्य प्रजातियों के लिए रु0 390 प्रति कुन्तल की दर से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान मिल रहा है। इस बढ़ोत्तरी से गन्ना किसानों को लगभग रु0 3000 करोड़ का अतिरिक्त गन्ना मूल्य भुगतान प्राप्त होगा।
प्रदेश में गन्ना उत्पादकता में वृद्धि हुई है। प्रदेश में वर्ष 2016-17 में औसत गन्ना उत्पादकता 72.38 मी. टन प्रति हेक्टेयर था जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 83.25 मी.टन प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हो गयी है। इस वृद्धि के फलस्वरुप किसानों की आय में औसतन रू0 400 प्रति कुन्तल की दर से रू0 43,480 प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। प्रदेश में विगत 09 वर्षों में 46.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने के साथ सह-फसली खेती से कृषकों को 25 प्रतिशत की अतिरिक्त आय हुई तथा गन्ना व चीनी उत्पादन में वृद्धि के कारण हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।



