Azamgarh News:कब्रिस्तान की जमीन छिनी तो ग्रामीणों के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल, “अब अपनों के शव कहां दफन करें?”
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
कब्रिस्तान की जमीन छिनी तो ग्रामीणों के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल, “अब अपनों के शव कहां दफन करें?”
बिलरियागंज,आजमगढ़।
मौत के बाद हर इंसान को दो गज जमीन नसीब हो, यही अंतिम उम्मीद होती है। लेकिन बिलरियागंज नगर पालिका क्षेत्र के जैगहां गांव के ग्रामीणों के सामने अब अपने मृत परिजनों के अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के सिवान में स्थित नवीन परती की जमीन का लंबे समय से हिंदू समुदाय द्वारा छोटे बच्चों और बुजुर्गों के शवों को दफनाने के लिए उपयोग किया जाता था। ग्रामीण इसे हिंदू कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे थे।
बताया गया कि पिछले दिनों उक्त जमीन को बिलरियागंज थाना निर्माण के लिए सम्मिलित कर लिया गया, जिसके बाद ग्रामीणों के पास बच्चों और बुजुर्गों के शवों को दफनाने के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं बचा। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी हुई है।
मामले को लेकर सूर्य प्रताप लाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रखी। जिलाधिकारी द्वारा नगर पालिका क्षेत्र में पूर्व कब्रिस्तान के आसपास उपलब्ध नवीन परती भूमि की आख्या मांगी गई। इसके बाद संबंधित लेखपाल द्वारा जग में खाता संख्या 00109 प्लाट नंबर 197मी० क्षेत्रफल 01710 हे० जमीन का विवरण नगर पालिका को उपलब्ध कराया गया। नगर पालिका ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर उसे एसडीएम सगड़ी को भेज दिया। वहीं, एसडीएम सगड़ी कार्यालय से संबंधित पत्रावली को आगे की कार्रवाई के लिए सीआरओ कार्यालय आजमगढ़ भेजा गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, सीआरओ कार्यालय में पहुंची पत्रावली पर यह कहते हुए रोक लगा दी गई कि सरकारी जमीन को हिंदू कब्रिस्तान के रूप में नहीं दिया जा सकता। इस बात की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वह भविष्य में अपने मृत बच्चों और बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक दफनाने के लिए केवल जमीन की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जीवन में जमीन का संघर्ष अलग बात है, लेकिन मृत्यु के बाद भी यदि दो गज जमीन के लिए संघर्ष करना पड़े तो यह बेहद पीड़ादायक है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के शवों को दफनाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही थी, लेकिन जमीन थाना निर्माण में शामिल होने के बाद अब पूरा समुदाय असमंजस में है।
बुधवार को इस मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और आपस में आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखते हुए नियम-कानून के दायरे में कोई वैकल्पिक सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी परिवार को अपने मृत परिजन के अंतिम संस्कार के लिए दर-दर भटकना न पड़े।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं करता है तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे। उनका सीधा सवाल है,“जब पहले से चली आ रही जमीन अब थाना निर्माण में चली गई है, तो हमारे मृतकों के शवों को आखिर कहां दफनाया जाएगा?”
इस मौके पर सूर्य प्रताप लाल श्रीवास्तव, जितेंद्र प्रजापति, श्रीराम प्रजापति, संदीप प्रजापति, प्रदीप प्रजापति, दयाराम पासवान, चंदन गुप्ता, जवाहर शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, भुंवर पासवान, हरिकिशन गौंड, केवल प्रजापति, बुद्धिराम प्रजापति समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।




