जबलपुर:पाटन में रावण भक्ति की अनूठी परंपरा, पिता के निधन के बाद बेटों ने संभाली विरासत
दशहरे पर रावण दहन नहीं, रावण की पूजा; लंकेश नामदेव के परिवार की अनोखी आस्था
जबलपुर जिले के पाटन में दशहरे के दिन जहां देशभर में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, वहीं यहां रावण भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिलता है। इस परंपरा की शुरुआत लंकेश नामदेव ने की थी, जो रावण को परम विद्वान मानते हुए उनकी प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते थे। पिछले वर्ष दशहरे के दिन ही हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया, लेकिन उनके बेटों राजकुमार नामदेव और परिवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। लंकेश नामदेव की रावण भक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने बेटों के नाम इंद्रजीत और मेघनाथ रखे थे, वहीं अपनी दुकानों के नाम जय लंकेश टेलर और जय लंकेश गैरेज रखे थे। इतना ही नहीं, वे शादी-विवाह के निमंत्रण पत्रों पर भी ‘जय लंकेश्वराय नमः’ लिखवाते थे। उनका मानना था कि रावण की विशेष कृपा से उनके सभी कार्य सफल होते हैं। स्थानीय नागरिक धर्म जैन और रवि ठाकुर के अनुसार, पाटन में रावण भक्ति की यह परंपरा अपने आप में अनूठी है, जिसे अब अगली पीढ़ी भी पूरी आस्था के साथ निभा रही है। जहां नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना के बाद दसवें दिन रावण दहन किया जाता है, वहीं पाटन की यह परंपरा आस्था और विश्वास के विविध रूपों को सामने लाती है। रावण भक्तों का मानना है कि जब तक भगवान राम का अस्तित्व रहेगा, तब तक रावण का नाम और अस्तित्व भी बना रहेगा।
बाइट राजकुमार
बाइट परी
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट



