कुशीनगर:नमाज़ (तरावीह) के साथ रमजान का आगाज,मस्जिदें नमाजियों से होती है गुलजार:कारी अबुल हसन

मुजीबु्र्रहमान कादरी मदरसा हनफिया फैजुल उलूम अहलेसुन्नत कोहरगड्डी कुशीनगर

रिपोर्ट: मसरूर रिज़वी

कुशीनगर माहे रमजान का चांद नजर आते ही रमजान में नमाजियों की तादाद में इजाफा हो जाती है । मुस्लिम समाज के लोगों ने रमजान की तैयारियों को लेकर बाजारों में सेवइयां,डबल रोटी तथा अन्य खाने-पीने की जरुरी चीजों की जमकर खरीदारी करते है । और नमाज व रोजा जकात से दूर रहकर यह मुनासिब नही है बल्कि रमजान के रात्रि में रमजान शरीफ के पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज (तरावीह) मस्जिदों में बड़ी संख्या में अदा करनी चाहिए ताकि रमजान की फजीलत से फैजेयाब हो सकें|
व कारी अबुल हसन नूरी ने अपने संबोधन में रमजान की अहमियत बयान करते हुए कहा कि रमजान (रोजे) का मकसद केवल भूखे वह प्यासे रहना नहीं है,बल्कि उसका असली अर्थ यह है कि हम अपने पड़ोसियों की,गरीबों की भूख और प्यास का भी ख्याल रखें,अगर आपके पड़ोस में कोई गरीब या कोई व्यक्ति भूखा है और उसके घर में भोजन नहीं है,तो उसकी मदद करें।उसको खाना पहुंचाएं।रमजान के पहले अशरा में यानी रमजान के पहले दस दिन रहमत और बरकात का आसरा होता है,इसमें पूरी मानवता के लिए पूरी इंसानियत के लिए और अपने देश के लिए दुआ करें, मानवता और सुख शांति की दुआ करते रहें ।

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