भागवत कथा सुनने से भक्ति और मुक्ति दोनों की प्राप्ति होती है : दयाशंकर शास्त्री

रिपोर्ट : अजित कुमार सिंह “बिट्टू जी” ब्यूरोचीफ हिन्द एकता टाइम्स

 

 

सुखपुरा(बलिया)।श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में मां काली मंदिर के प्रांगण में श्रीमद्भागवत भागवत कथा के तीसरे दिन कृष्ण जन्म के प्रसंग में नंद बाबा के घर में जन्मोत्सव का वर्णन आचार्य दयाशंकर शास्त्री ने किया। जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए तथा मिठाइयां बांटकर एवं बधाइयां देकर नन्दोत्सव की खुशियां मनाई गई। आचार्य जी ने ओजस्वी वाणी से संगीतमय कथा सुनाते हुए भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की कथा का विस्तार से वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि जब जब पृथ्वी पाप के बोझ से दबने लगती है। तथा पाप बढ़ता है, तब तब श्री हरि अवतार लेकर पाप और पापी का नाश कर पुन: धर्म को स्थापित करते हैं। मथुरा के राजा कंस ने पाप का आचरण करते हुए अपने ही पिता को कारावास में डालकर सत्ता पर आसीन होकर प्रजा पर अत्याचार किया। तथा जब उसे पता चला कि उसकी सगी बहिन देवकी की आठवीं संतान ही उसके काल का कारण बनेगी ।तो उसने बहन देवकी व उसके पति वासुदेव को कारावास में बंद कर दिया, लेकिन श्री हरि की कृपा से माया के कारण कारावास के बंद पडे़ द्वार खुल गए, व मायावश वासुदेव भगवान कृष्ण को उफनती यमुना को पार कर सकुशल बाबा नंद के घर छोड़ देते है तथा बाबा नंद के घर में पुत्र होने का समाचार पाकर पूरे नंद में आनंद छा जाता है। आचार्य दयाशंकर शास्त्री जी कहा कि यह कथा मानव को भवसागर से पार भी कराती है। समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने पर प्रकाश डाला। ईश्वर की सत्ता हर जगह विद्यमान है और अहसास भी कराती है मनुष्य को जीवन के जीने का तरीका भी बताती है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु यज्ञ शाला की परिक्रमा कर रहे है। यज्ञ में हवन करने से वातावरण भी शुद्ध भी होता है। मंत्रोच्चार से पूरा नगर गुंजायमान हो रहा है। भक्ति में पूरा नगर झूम रहा है। भागवत कथा सुनने से भक्ति और मुक्ति दोनो की प्राप्ति होती है।

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