अष्टमी व्रत एवं पर्व 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आचार्य अनिल मिश्र

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विनय मिश्र जिला संवाददाता।

 

देवरिया।अष्टमी का व्रत एवं पर्व २४ अक्टूबर २०२४ गुरुवार को मनाई जाएगी। मथुरा के राधाकुण्ड में अरुणोदय समय स्नान किया जाएगा। इसे महाराष्ट्र में कराष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान भास्कर आज दिन में २:२७ बजे स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मण्डूक वाहन जलानाड़ी तथा नक्षत्र के देवता बुध होने के कारण अल्प वृष्टि योग है।

रम्भा एकादशी व्रत का मान सबके लिए २८ अक्टूबर २०२४ सोमवार को होगा एवं आज ही प्रदोष काल में द्वादशी तिथि मिलने के कारण गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी ।आज के दिन गाय के दूध से बनी किसी खाद्य पदार्थ सामग्री का सेवन नहीं करना चाहिए। बछड़ा सहित दुधारु गाय का विधिवत् पूजन कर ताम्र पात्र से निम्न मंत्र की सहायता से अर्ध्य दिया जाएगा —

*क्षीरोदार्णवसंभूते सुरासुरनमस्कृते।*

*सर्वंदेवमयी मातर्गृहाणार्घ्यं नमो नमः।।*

ऋण से छुटकारा पाने के लिए भौम प्रदोष का व्रत २९ अक्टूबर २०२४ को किया जाएगा। धनवन्तरि जयन्ती एवं धन त्रयोदशी (धनतेरस) का प्रसिद्ध पर्व २९ अक्टूबर २०२४ मंगलवार को प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि में संपन्न होगा। धन-ऐश्वर्य में वृद्धि की कामना से आज महालक्ष्मी का विधिवत पूजन सायं काल स्थिर वृष लग्न ६:१९ से ८:१५ बजे के मध्य किया जाएगा । आज के दिन झाड़ू , सोना, चांदी, बर्तन एवं स्वर्ण अथवा स्वर्णमय कलश खरीदना शुभ माना जाता है। इसे कामेश्वरी जयन्ती के नाम से भी जाना जाता है। आज अपमृत्यु से बचाव हेतु सायंकाल घर के बाहर तिल के तेल में चतुर्वर्ति (चौमुख) दीपक जलाया जाएगा। इसके लिए निम्न मंत्र का प्रयोग किया जाएगा-

*मृत्युना पाशदण्डाभ्याम् कालेन यमया सह ।*

*त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीयतां ममेति ।।*

मास शिवरात्रि एवं तेरस का व्रत ३० अक्टूबर २०२४ बुधवार को होगा। नरक चतुर्दशी सहित हनुमत जयन्ती आज ही मनाई जाएगी। नरक के उद्देश्य से उसमें पड़े हुए पितृ बन्धु- बान्धवों की मुक्ति हेतु घर के बाहर कूड़ा- राख इत्यादि पर सरसों के तेल में चौमुख दीपदान किया जाएगा —

*ततो दीपश्चतुर्दश्यां नरक प्रीतये मया।*

*चतुर्वर्ति समायुक्त: सर्वपापापनुत्तये।।*

सायं मेष लग्न में ४:५४ से ६:३१ बजे तक हनुमान जी के भक्तजन हनुमत मंदिरों, मठों, वैष्णव पीठों एवं अपने घरों में हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड, हनुमत लहरी, हनुमत सहस्रनाम आदि का पाठ मंत्र जप आदि द्वारा पूजन कर हर्षोल्लास के साथ हनुमत जयन्ती मनायी जायेगी।

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