भारतीय संस्कृति की संजीवनी है संस्कृत भाषा – प्रो. शैलेश तिवारी 

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विनय मिश्र जिला संवाददाता

बरियारपुर , देवरिया।

भारतीय संस्कृति की जीवन्तता को बनाये रखने में संस्कृत भाषा संजीवनी का कार्य करती है। संस्कृत भाषा पूर्णतया वैज्ञानिक भाषा है। इसके अध्ययन से अन्य भाषाओं की अपेक्षा बुद्धि का विकास तीब्र गति होती है । उक्त बातें श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय बैकुण्ठपुर देवरिया के 66वें वार्षिकोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि प्रो. शैलेश तिवारी ने कहा।

सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. रामकेश्वर तिवारी ने कहा कि संस्कृत ही सभी संस्कारों का संवाहक है। संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र बैकुंठपुर को छोटी काशी के रूप में जाना जाता है। संस्कृत भाषा के विकास व संबर्धन में श्री बैकुण्ठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय का अप्रतीम योगदान रहा है। कार्यक्रम में प्रो. सुधाकर मिश्र , प्रो. ब्रजभूषण ओझा, प्रो. शैलेश तिवारी , डॉ. सिंहासन पाण्डेय , श्री सदानन्द मिश्र ज्योतिषचार्य व चन्द्रभूषण पाण्डेय को “पवहारीश्री” सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित गिरीश चंद्र तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष देवरिया ने किया। कार्यक्रम को सुरेंद्र चौरसिया विधायक रामपुर कारखाना, रमापतिराम त्रिपाठी पूर्व सांसद देवरिया, डॉ. विजयमणि त्रिपाठी, अखिलेन्द्र शाही , महेंद्र यादव, विजय दूबे, रजनी पाण्डेय, आनंद सागर तिवारी आदि ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण व दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय शुक्ल ने किया।अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. योगेश कुमार चतुर्वेदी ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार ज्ञापित किया किया। इस अवसर पर श्री अखिलेश पाण्डेय, डॉ. मनीष कुमार शुक्ल, सम्पूर्णानन्द मिश्र, डॉ. मिथिलेश शुक्ल, साधना मिश्रा, डॉ. युगल किशोर तिवारी, डॉ. ओंकार नाथ पाण्डेय , शैलेश पाण्डेय, प्रवीण मिश्र, रविशंकर दूबे, डॉ. कमलेश मिश्र आदि उपस्थित रहे।

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