संस्थापक प्राचार्य राज नारायण पाठक की सातवीं पुण्यतिथि मनाई गई

विनय मिश्र ,जिला संवाददाता।
बरहज ,देवरिया। स्थानीय बाबा राघव दास भगवान दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय आश्रम बरहज के सभागार में संस्थापक प्राचार्य राज नारायण पाठक की मनाई गई । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वीरेंद्र त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा महंत प्रसाद कुशवाहा, बलभद्र त्रिपाठी वीरेंद्र मणि त्रिपाठी रहे कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय श्री राज नारायण पाठक के चित्र पर मुख्य अतिथि सहित विशिष्ट अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण मुरारी तिवारी शिक्षक परशुराम पांडे द्वारा शांति पाठ किया गया श्री कृष्णा इंटर कॉलेज की छात्रा अंकित पाठक अमृता गुप्ता खुशबू जायसवाल द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम जी यादव ने कहा कि पाठक जी एक कर्मठ और आश्रम के प्रति निष्ठावान एवं जीवन भर समर्पित रहे रमेश तिवारी अनजान में अपनी कविता के माध्यम से पाठक जी को श्रद्धांजलि दी वही रामेश्वर यादव ने भी काव्य पाठ के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किया विशिष्ट अतिथि महंथ प्रसाद कुशवाहा, ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पाठक जी का अविस्मरणीय योगदान रहा है 1970 में महंत राजा राम शरण जी के नेतृत्व में पाठक जी ने डिग्री कॉलेज की नीव रखी, जो आज सात विषयों से एम ए, एवं एम काम,पीएचडी की उपाधियां दी जा रही है । बलभद्र त्रिपाठी ने कहा कि राज नारायण पाठक का नाम आश्रम से लेकर सभी शिक्षण संस्थानों में अक्षरों में अंकित है उनके त्याग एवं तपस्या को बुलाया नहीं जा सकता जब तक सारी शिक्षण संस्थाएं रहेंगे तब तक पाठक जी का नाम अमर रहेगा पाठक जी की पुत्रवधू डॉक्टर किरण पाठक ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के लिए बाबूजी एक-एक महीने तक घर का काम छोड़कर नेताओं और मंत्रियों के पीछे दौड़ते रहे और आश्रम की सभी शिक्षण संस्थाओं का सतत विकास करते रहे आज उनकी पुण्यतिथि पर हम श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं परहंसानत शिक्षा मंदिर की सदस्य श्रीमती सावित्री राय ने पाठक जी के कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रारंभिक अवस्था में जब मैं घर से बाहर आई थी तो लोगों ने बताया था कि आप पाठक जी से संपर्क कीजिए वह आपका सहयोग करेंगे पाठक जी से मिलने के बाद मुझे लगा कि बरहज में भी कोई मेरी मदद करने वाला मिल गया तब से निरंतर में उनके सानिध्य प्राप्त करती रही आज वह हम लोगों के बीच नहीं रहे मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं मुख्य अतिथि वीरेंद्र त्रिपाठी ने पाठक जी के कार्य कुशलता कार्य क्षमता उनके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ था किसी भी सामाजिक संस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यों के लिए कार्य के लिए निकल पडते थे, और उसे पूरा करके ही दम लेते थे कार्यक्रम को वीरेंद्र मणि त्रिपाठी देवरिया महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर शंभू नाथ तिवारी ने संबोधित किया कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आश्रम के पीठाधीश्वर आजनेय दास जी महाराज ने कहा कि आश्रम के पांचवें पीठाधीश्वर चंद्र देव शरण जी महाराज एवं पाठक जी में कोई अंतर नहीं था दोनों एक दूसरे के पूरक थे, दोनों लोगों के सकुशल संचालन में आश्रम की सभी शिक्षण संस्थाएं विकास की ओर बढ़ चली थी। कार्यक्रम में प्रोफेसर आरती पांडे ,गिरीश गायत्री मिश्रा, आशुतोष पांडे, डॉक्टर प्रज्ञा तिवारी ,रामाश्रय यादव ,प्रोफेसर अमरीश त्रिपाठी, प्रोफेसर सूरज प्रकाश गुप्त, विनय कुमार मिश्र, राम श्रृंगार पांडे, सुभाष यादव ,रमेश चौरसिया ,शेषनाथ रावत, डॉक्टर संजय सिंह, योगेंद्र वर्मा ,दिनानाथ यादव सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश शुक्ला ने किया।



