वीरपुर मिश्र में विष्णु महायज्ञ के दौरान तीसरे दिन श्री राम कथा।

 

विनय मिश्र, जिला संवाददाता।

भलुअनी, देवरिया। प्राचीन शिव मंदिर वीरपुर मिस्र में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ के दौरान श्री राम कथा के तीसरे दिन गोरखपुर जनपद के परसिया मिश्र निवासी एवं बाबा राघव दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय देवरिया के प्राचार्य प्रोफेसर शरद चंद्र मिश्र ने भरत चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले अमृत देवताओं ने ले लिया हलाल विष को भगवान शिव ने पान किया वैसे ही 14 वर्षों के लिए भारत के प्रेम रुपी अमृत को प्रभु श्री राम ने मथ कर बाहर किया प्रेम रुपी अमृत भरत को मिला और विष को कैकई ने पान किया, राम वन गमन में के द्वारा जो अनर्थ के 14 द्वारा खोले गए थे उन सारे दरवाज को भरत ने बंद कर दिया इन 14 वर्षों में भरत ने भाई से भाई के प्रेम को प्रकट किया भारत रूपी प्रेम के सामने वशिष्ठ जैसे विद्वान की बुद्धि भी काम नहीं कर रही थी वशिष्ठ की बुद्धि एक अबला स्त्री की भाति खड़ी थी , पूज्यपद गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज लिखते हैं कि मुनि मति तीर ठाडी अबला सी प्रभु श्री राम और भरत के प्रेम को देखकर गुरुदेव वशिष्ठ को समझ में नहीं आया भरत पयोधि गंभीर, आगे उन्होंने चर्चा करते हुए कहा कि प्रेम की परिभाषा अगर सीखना हो तो आज का मानव भरत से और राम से सीखे प्रेम से बढ़कर दुनिया में और कुछ भी नहीं है राम लक्ष्मण भारत और शत्रुघ्न का प्रेम अविस्मरणीय है अगर मनुष्य अपने जीवन में उतार ले तो कभी किसी से किसी तरह का विवाद नहीं हो सकता।राम कथा जन मानव कल्याण के लिए गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिपिबद्ध किया संसार में सबसे बड़ा ग्रंथ रामचरितमानस है जिसे एक सामान्य से सामान्य व्यक्ति पड़ सकता है और समझ सकता है इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सत्संग करना चाहिए और सत्संग के माध्यम से अपनी बुद्धि को सदा निर्मल बनाए रखना चाहिए ।कथा के दौरान पंडित माधव मिश्र, लोलार्क मिश्र, संदीप मिश्रा ,उमेश मिश्रा ,भीम मद्धेशिया, बृजमोहन मद्धेशिया, घनश्याम यादव, सुनील मद्धेशिया ,अरविंद मद्धेशिया, मदन मद्धेशिया ,ग्राम प्रधान बाबूलाल मद्धेशिया एवं क्षेत्र एवं ग्रामवासी श्रद्धालु भक्तजन काफी संख्या में उपस्थित रहे।

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