केवट प्रसंग की कथा सुन झुम उठे, श्रद्धालु।
,बरहज देवरिया।
हनुमान मंदिर बरहज में चल रहे श्री राम कथा में कानपुर से पधारी साध्वी सुश्री निलेश शास्त्री ने केवट प्रसंग की कथा का का रसपान कराते हुए कहां की भगवान राम के वन गमन की यात्रा प्रारंभ हो चुकी थी यात्रा के दूसरे दिन भगवान गंगा के पावन तट पर पहुंच गए थे वहां उन्होंने केवट से पर जाने की बात कही लेकिन केवट नाम लेकर आने से इनकार कर दिया गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज रामचरितमानस में लिखते हैं मागी नाव न केवट आना ,कहहि तुम्हार मरम मैं जाना ,, केवट ने कहा क्यों महाराज मैं आपके बारे में अच्छी तरह से जानता हूं कि आपके पैरों में जादू है जिस शीला को आप छू देते हैं वह स्त्री के रूप में परिवर्तित हो जाती है मेरी काट की नाव है, अगर यह स्त्री के रूप में परिवर्तित हो जाएगी तो हमारे बच्चे भुखो मर जाएंगे केवट ने कहा कि एहि प्रतिपालेउ सब परिवारेऊ इसी से मैं अपने परिवार का पालन पोषण करता हूं भगवान मुस्कुराए केवट चाहता था कि मैं भगवान के चरण का प्रक्षालन करूं इसलिए केवट नाव लेकर आने में आनाकानी कर रहा
था विलंब होने पर भगवान ने कहा कि आनि गंगा जल पाव पखारू, होत विलंब उतारहू पारू,,के केवट जैसे भगवान का आदेश पाते ही, प्रसन्नता पूर्वक कठौती में जल भरकर लाया और पूरे परिवार के साथ भगवान के चरण को धोया चरण अमृत का पान किया और भगवान को गंगा पार किया। के दौरान हनुमान मंदिर के मंहत श्री 1008 के श्री मारूति जी महाराज उर्फ त्यागी बाबा, सीमा शुक्ला, राम आशीष यादव, रामाशंकर यादव, रामायण यादव, उमेश चंद चौरसिया, सोनू भारद्वाज, चंद्रभान तिवारी, रमाशंकर, श्याम सुंदर दास, प्रभाकर शुक्ला सीमा देवी ,रजवंती देवी, कुसुम ,सरिता देवी, बदामी देवी, सहित नगर एवं क्षेत्र के सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।



