श्रीमद् भागवत कथा सुनकर धुंधकारी का हुआ था उद्धार
Dhundakari was saved by listening to the Srimad Bhagwat Katha.

पवई (आजमगढ़) धुधुरी गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भी भक्ति का रस प्रवाहित होता रहा। श्री धाम वृंदावन के आचार्य उत्कर्ष पाण्डेय जी महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए श्रोताओं को अध्यात्म की गहराई में ले गए। द्वितीय दिवस की कथा का आरंभ धुंधकारी मोक्ष के मार्मिक प्रसंग से हुआ। जिसने यह सिद्ध किया कि भागवत की शक्ति से कैसा भी पापी क्यों न हो, उसका उद्धार संभव है।कथा व्यास ने बताया कि भागवत की रचना के पीछे एक गहन उद्देश्य छिपा है। उन्होंने शौनक आदि ऋषियों के छह प्रश्नों का उल्लेख किया। जिनके उत्तर में ही संपूर्ण भागवत का सार निहित है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि कैसे नारद मुनि ने व्यास जी को उपदेश देकर भागवत की रचना के लिए प्रेरित किया।कथा व्यास ने नाम-जप और प्रेम के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे केवल चार श्लोकों वाली मूल भागवत के ज्ञान से व्यास जी ने 18,000 श्लोकों की विशाल रचना की। इसके बाद उन्होंने शुकदेव जी की उत्पत्ति और उन्हें भागवत ग्रंथ प्राप्त होने की अद्भुत कथा का वर्णन किया।यह कथा न केवल आध्यात्मिकता का ज्ञान दे रही है, बल्कि जीवन के हर पहलू को सकारात्मकता से देखने की प्रेरणा भी दे रही है। आचार्य जी का मधुर वाणी और भावपूर्ण वर्णन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है।



