Mau News:अमिला के निलंबित लेखपाल ने सस्पेंड होने के बाद सम्बन्धित बरसात दर्ज कर दी।

घोसी।मऊ। भ्रष्टाचार पर सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति को अमिला में तैनात एक लेखपाल ने जैसे ठेंगा दिखा दिया हो! बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष दुर्गविजय राय की शिकायत के बाद डीम के निर्देश पर एसडीएम अशोक कुमार सिंह ने लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि 29 अक्टूबर को सस्पेंशन के तुरंत बाद ही उसी लेखपाल ने बरसात रिपोर्ट लगाते हुए राजस्व निरीक्षक ने अपनी सहमति देते हुए 30 अक्टूबर रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यकाल को भेज दिया। और 31 को खतौनी दर्ज भी कर दिया गया। लोगों को बीच चर्चा रही की इस तरह की कार्यवाही हर लोगों के केश में हो।
नियम साफ कहते हैं कि निलंबन के उपरांत कोई सरकारी कर्मचारी अपने पद से संबंधित कार्य नहीं कर सकता। ऐसे में सस्पेंड लेखपाल ने आखिर कैसे पोर्टल चलाया।और बड़ा सवाल राजस्व निरीक्षक ने उस वरासत को अप्रूव कैसे कर दिया? क्या पूरा तंत्र इस खेल में शामिल था।पूर्व जिलाध्यक्ष दुर्गविजय राय का आरोप है कि लेखपाल ने उनके भाई से ₹6000 की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद अधिकारी हरकत में आए और लेखपाल को निलंबित कर दिया गया। लेकिन सस्पेंशन के बाद लेखपाल ने मानो ‘जवाबी हमला’ किया — वरासत दर्ज कर दी और फिर धरने पर बैठ गया! प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया, क्योंकि सवाल सिर्फ एक नहीं, कई हैं।
अगर वरासत दर्ज करना इतना आसान था, तो इतने महीनों तक मामला क्यों लटका रहा। वही शिकायत कर्ता दुर्गविजय राय ने इस पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए इसकी गंभीरतापूर्वक जांच कर सख्त कार्यवाही हो।
एसडीएम अशोक कुमार सिंह ने बताया कि निलंबन के बाद किसी भी कर्मचारी को कार्यालय या पोर्टल पर काम करने का कोई अधिकार नहीं है लेकिन निलंबित लेखपाल ने पोर्टल खोलकर वरासत दर्ज की है, इसे सेवा अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है । जांचोंप्रान्त सख्त कार्रवाई होगी।

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