Deoria news:श्रीमद् भागवत कथा का पंचम दिवस
*श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस
देवरिया।
ग्राम बनकटा मिश्रा चल रहे भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी ने भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जैसे दर्पणमें विपरीत दीखता है, ऐसे ही मायारूप संसार भी विपरीत दीखता है। संसारसे कुछ लेनेकी इच्छा रखनेसे नुकसान होता है और देनेकी इच्छा रखनेसे लाभ होता है। दूसरोंका हित करनेसे हमारा हित होता है- ‘ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः’ (गीता १२।४)। जैसे, बीज जमीनमें डाल दें तो खेती हो जाती है और खुद खा लें तो रेती हो जाती है! अपनी भूख मिटानेसे पहले दूसरोंकी भूख मिटाओ। दूसरोंका हित कैसे हो-इसको सीखनेके लिये ही हम यहाँ एकत्र हुए हैं। माँ हमें अच्छी क्यों लगती है? कि वह हमारा पालन करती है। जो दूसरेके दुःखसे दुःखी होता है, उसको अपने दुःखसे दुःखी नहीं होना पड़ता।
भगवान्को याद करना और सेवा करना- ये दो काम खास मनुष्योंके लिये हैं। इनके बिना मनुष्यपना नहीं है। जैसे नामजप आदिसे कल्याण होता है, ऐसे ही दूसरोंका हित करनेसे भी कल्याण होता है। यह कर्मयोग है। कथा के दौरान कथा के मुख्य यजमान सपरिवार एवं क्षेत्र और गांव के श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे।



