Deoria news:संयोग वियोग में संयोग अनित्य है, और वियोग नित्यआचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी

श्रीमद् भागवत कथा
संयोग वियोग में संयोग अनित्य है और वियोग नित्य है, आचार्य बृजेश मणि त्रिपाठी।
देवरिया।
सलेमपुर के ग्राम भरौली प्यासी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य बृजेश श्री त्रिपाठी ने भागवत कथा का रसपान कराते हुए कहा कि
संयोग-वियोगमें संयोग अनित्य है और वियोग नित्य है। जो अनित्य है, उसकी इच्छा करेंगे तो रोना पड़ेगा। पहले भी वियोग था, पीछे भी वियोग होगा और अभी जो संयोग है, वह भी निरन्तर वियोगमें जा रहा है। यदि संयोग अवस्थामें ही वियोगका अनुभव कर लें तो निहाल हो जायँ !
सुख देनेसे अविनाशी सुख मिलता है और सुख लेनेसे नाशवान् सुख मिलता है। सुख दे दो तो वह अक्षय हो जायगा और सुख ले लो तो वह नष्ट हो जायगा।
कथा के दौरान श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान सहित गांव और क्षेत्र के भागवत कथा के श्रद्धालु जन काफी संख्या में उपस्थित रहे।

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