Azamgarh news :विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं थाना ए.एच.टी. मानव तस्करी रोधी की मासिक समीक्षा एवं समन्वय बैठक सम्पन्न

विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं थाना ए.एच.टी. मानव तस्करी रोधी की मासिक समीक्षा एवं समन्वय बैठक सम्पन्न

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आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
आज दिनांक 18.11.2025 को समय 13:00 बजे पुलिस लाइन, आज़मगढ़ स्थित सभागार में श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन में, श्रीमान अपर पुलिस अधीक्षक यातायात/नोडल अधिकारी थाना ए.एच.टी./एस.जे.पी.यू. महोदय के पर्यवेक्षण में तथा श्रीमान क्षेत्राधिकारी सदर महोदया की अध्यक्षता में विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) एवं थाना ए.एच.टी. की मासिक समीक्षा एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं एनजीओ प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया, जिनमें प्रमुख रूप से–
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.डी. यादव, श्री दिनेश कुमार वर्मा (बेसिक शिक्षा विभाग), मोहम्मद नज़रे आलम (श्रम प्रवर्तन अधिकारी), सहायक अभियोजन अधिकारी श्री तारकेश्वर सिंह एवं श्री कृष्ण कुमार राय, CWC अध्यक्ष श्री रजनीश श्रीवास्तव, चाइल्ड हेल्पलाइन प्रतिनिधि मोनी राजेश राय, वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर सरिता पाल एवं ममता यादव, जन विकास संस्थान के श्री विकास चन्द्र, DCPU की रिंकी सिंह, अली संस्था से कनीज फ़ातिमा एवं सोनी, RPF, DCRB तथा जनपद के सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारी शामिल रहे।
थाना ए.एच.टी./SJPU प्रभारी निरीक्षक अभयराज मिश्रा अपनी टीम सहित उपस्थित रहे।
बैठक में बाल अधिकार, महिला सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम, तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रभावी अनुपालन पर विस्तृत चर्चा की गई।
थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों द्वारा कार्य के दौरान आने वाली समस्याओं को सुनते हुए उनके समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान किए गए।
बैठक में निम्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत आरोपी/पीड़ित की उम्र निर्धारण प्रक्रिया का शत-प्रतिशत पालन।
चिकित्सीय परीक्षण के दौरान 12 वर्ष से कम पीड़िता के लिए माता-पिता की सहमति तथा 12 वर्ष से अधिक की पीड़िता के लिए उसकी स्वयं की सहमति अनिवार्य।
किसी भी नाबालिग के थाने पर आने पर बाल कल्याण अधिकारी द्वारा तत्काल आवश्यक कार्यवाही।
POCSO मामलों में पंजीकरण/बढ़ोत्तरी की सूचना 24 घंटे के भीतर CWC को अनिवार्यतः भेजना।
सूर्यास्त के बाद किसी भी महिला/पीड़िता को थाने में न रखते हुए वन स्टॉप सेंटर में भेजना।
श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम से मुक्त बच्चों को CWC के समक्ष प्रस्तुत करना।
किसी भी बच्चे को थाने के लॉकअप में न रखा जाए—उसे SJPU/बाल कल्याण अधिकारी को सुपुर्द किया जाए।
नाबालिग पीड़ित/पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण साधारण वस्त्रों में कराया जाए।
POCSO एवं जुवेनाइल से संबंधित प्रेस विज्ञप्तियों में पीड़िता/बाल अपचारी की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाए।
बैठक के अंत में श्रीमान क्षेत्राधिकारी सदर महोदया द्वारा मानव तस्करी, बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सभी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए तथा समन्वय एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया। आजमगढ़ पुलिस बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा एवं मानव तस्करी की रोकथाम हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

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