Azamgarh news:अमर शहीद भगवती प्रसाद सिंह के शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब,भावुक हुए लोग

A huge crowd gathered on the martyrdom day of immortal martyr Bhagwati Prasad Singh, people became emotional.

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रिपोर्ट चन्द्रेश यादव

अतरौलिया।

“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले…” की पंक्तियाँ शुक्रवार को मदियापार–अहिरौला मार्ग स्थित शहीद उपवन में साकार होती दिखाई दीं, जब 1962 के भारत–चीन युद्ध में वीरगति को प्राप्त अमर शहीद भगवती प्रसाद सिंह के शहादत दिवस पर विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा।

बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने उनकी आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर इस वीर सपूत को नमन किया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि राजाराम सिंह ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर तथा विशिष्ट अतिथि भाजपा लालगंज जिलाध्यक्ष विनोद राजभर उपस्थित रहे। संचालन का दायित्व खालिद आजमी ने संभाला।

 

मुख्य अतिथि हुए भावुक

 

भावुक होते हुए अरुण राजभर ने कहा—

“मैं उस मिट्टी और उस माँ को प्रणाम करता हूँ, जिसने ऐसा वीर जन्मा। शहीदों के सम्मान में हर संभव कार्य करूंगा।”

उन्होंने शहीद परिवार को आश्वस्त किया कि उनकी हर आवश्यकता पर वे सदैव साथ खड़े रहेंगे।

 

विशिष्ट अतिथि विनोद राजभर ने कहा कि शहीद भगवती प्रसाद सिंह ने लद्दाख के माइनस तापमान में दुश्मन से डटकर मुकाबला किया, और आज उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

 

गीत, प्रस्तुति और भावनाओं से भरा वातावरण

 

आरपीएस पब्लिक स्कूल, नाउपुर के बच्चों की देशभक्ति प्रस्तुतियों ने सभी को भावुक कर दिया।

गायक कलाकार दुष्यंत शुक्ला के जोशीले गीतों ने माहौल को ऊर्जा से भर दिया।

एनसीसी कैडेट्स द्वारा दी गई सलामी ने कार्यक्रम को और गरिमामय बना दिया।

 

शहीद की एकमात्र पुत्री सुदामा देवी को मंच से अंगवस्त्र और स्मृति–चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह की आँखें नम हो उठीं।

 

शहीद की जीवन-यात्रा: एक प्रेरक कथा

 

5 मई 1937 को एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे शहीद भगवती प्रसाद सिंह बचपन से ही

अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति की मिसाल थे।

20 सितंबर 1962 को उनकी पुत्री का जन्म हुआ, लेकिन जन्म के मात्र डेढ़ महीने बाद ही युद्ध की पुकार पर वे सीमा के लिए रवाना हो गए।

विदा होते समय कहा गया उनका अंतिम वाक्य—

“अगली बार आऊंगा तो मेरी बिटिया मुझे पहचानने लगेगी…”

आज भी लोगों के हृदय को द्रवित कर देता है।

इस अवसर पर जंग बहादुर सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, हरीश तिवारी, गुडलक सिंह, संतोष यादव, फूलचंद यादव, ज्ञानचंद, भालचंद्र त्रिपाठी, प्रवीण सिंह, मास्टर राजेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह, कवि राहगीर, लक्ष्मण मौर्य, सत्य प्रकाश सिंह, मुन्नू सिंह, राजेश सिंह, अखंड सिंह तथा शहीद परिवार से भोजपुरी अभिनेता अथर्व सिंह एवं विपिन सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राजेंद्र सिंह ने अंगवस्त्र और स्मृति–चिह्न देकर सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

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